
नई दिल्ली। सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत (India) के फैसले के बाद पाकिस्तान (Pakistan) की चिंता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने के निर्णय के पश्चात पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगी है। इसी क्रम में इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (International Conference) आयोजित किया गया, जिसमें मंत्री, सांसदों के साथ जल और अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के फैसले के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समर्थन हासिल करना और संधि की अहमियत को रेखांकित करना था।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को किसी भी परिस्थिति में राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। डार का कहना था कि यदि पाकिस्तान के अधिकारों से समझौता हुआ तो इसका असर पूरे क्षेत्र की शांति और करोड़ों लोगों के हितों पर पड़ेगा।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि किसी देश का एहसान नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच हुआ एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं, सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने भारत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई देश एकतरफा किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को निलंबित कर सकता है, तो इससे वैश्विक समझौतों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सिंधु जल संधि को दुनिया के सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक बताया।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। उस समय भारत ने स्पष्ट कहा था कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” इसके साथ ही पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाया गया।
सिंधु नदी प्रणाली का पानी पाकिस्तान के लिए खेती, पेयजल और बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत है। संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान को जल प्रवाह और भारत से मिलने वाली हाइड्रोलॉजिकल जानकारी को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण पाकिस्तान लगातार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है, जबकि भारत का रुख अब भी स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद समाप्त होने तक सिंधु जल संधि को पूर्व स्थिति में बहाल नहीं किया जाएगा।
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