
रियल एस्टेट को सरकार का बड़ा झटका
इंदौर। राज्य सरकार (state government) द्वारा रियल एस्टेट (Real Estate) क्षेत्र को बड़ा झटका दे दिया गया है। सरकार की ओर से जारी किए गए आदेश के आधार पर अब बहुमंजिला इमारत (multi-story) और व्यावसायिक भवन (commercial buildings) में भी आश्रय निधि के प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। इन प्रावधानों को लागू किए जाने से इन भवनों में भी गरीब और एलआईजी वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू हो गई है।
निगम द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 एवं मध्यप्रदेश नगर पालिक (कॉलोनी विकास) नियम 2021 के अंतर्गत नगर पालिक निगम इंदौर क्षेत्र अंतर्गत विकसित कालोनियों, योजनाओं के भूखंडों पर अपार्टमेंट्स, बहु-इकाई, ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं पर कॉलोनी विकास अनुमति के साथ ही आश्रय निधि अधिरोपित की जा रही है। इस आदेश में कहा गया है कि नगर निगम के विभिन्न भूस्वामियों, कॉलोनाइजरों द्वारा विकसित कॉलोनी के भूखंडों पर आवासीय या गैर-आवासीय या दोनों के प्रयोजन से अपार्टमेंट्स, बहु-इकाई, ग्रुप हाउसिंग निर्मित करके विक्रय करने या अन्यथा अंतरित करने के आशय से भवन निर्माण किया जा रहा है। अब तक तो सरकार द्वारा आश्रय निधि का प्रावधान कॉलोनी में ही लागू किया गया था, अब इस आदेश के माध्यम से यह प्रावधान बहुमंजिला इमारत, ग्रुप हाउसिंग और व्यावसायिक इमारत पर भी लागू हो गया है।
या तो 6 से 9 प्रतिशत तक निर्मित क्षेत्र आरक्षित करो या फिर गाइड लाइन की 6 प्रतिशत आश्रय निधि राशि भरो
वर्तमान में प्रचलित नियमों के अनुसार कॉलोनाइजर को कॉलोनी विकसित करने के पूर्व सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करना होती है और उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग एवं निम्न आय वर्ग हेतु आवास अथवा उसके स्थान पर आश्रय शुल्क देय होता है, लेकिन अब किसी भी प्लॉट या जमीन के टुकड़े पर यदि बहुमंजिला इमारत या ग्रुप हाउसिंग का निर्माण किया जाता है तो उसमें निर्माण करने वाले बिल्डर को निर्मित क्षेत्र का 9′ अत्यंत गरीब वर्ग के लिए और 6′ गरीब वर्ग के लिए आरक्षित करना होगा। यदि बिल्डर यह आरक्षण नहीं करना चाहता है तो उसे गाइड लाइन की कीमत की 6′ राशि जमा करवाना होगी।
पहले केवल कॉलोनी पर लगता था आश्रय शुल्क
मध्यप्रदेश नगर पालिक (कॉलोनी विकास) नियम 2021 के अनुसार कॉलोनी को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि ‘कॉलोनी से आशय है कि किसी भूमि का भाग, जिसे आवासीय या गैर-आवासीय या दोनों के प्रयोजन से भूखंडों में विभाजित करके या उस पर अपार्टमेंट निर्मित करके विक्रय करने या अन्यथा अंतरित करने के आशय से विकसित किया गया है या वह विकास के अधीन है।’ इस परिभाषा से स्पष्ट है कि विकसित कॉलोनी के भूखंड पर कॉलोनाइजर द्वारा विक्रय या अन्यथा अंतरित करने के आशय से अपार्टमेंट्स, बहु-इकाई, ग्रुप हाउसिंग का निर्माण किया जाता है तो वह कॉलोनी की श्रेणी अंतर्गत माना गया है। ऐसे में इन पर मध्यप्रदेश नगर पालिक (कॉलोनी विकास) नियम 2021 में निहित प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।
आश्रय निधि की जबरिया वसूली को लेकर निगम ने जारी कर डाले 200 से ज्यादा नोटिस, भडक़े बिल्डर और कॉलोनाइजर, क्रेडाई ने बुलाई बैठक
वर्षों पुराने नियमों की मनमानी व्याख्या करते हुए निगम ने 200 से अधिक नोटिस भूमि और भूखंडों पर विकास अनुमति प्राप्त करने और आश्रयनिधि जमा कराने के संबंध में जारी कर डाले, जिसके चलते बिल्डर और कालोनाजर भडक़ उठे और आज उनकी संस्था क्रेडाई ने इसी मुद्दे पर दोपहर को बैठक भी बुलाई है। निगम 3100 वर्गफीट के बड़े भूखंडों पर बनने वाली छोटी मल्टी से भी यह शुल्क दूसरी बार लेने जा रहा है। सवाल यह भी है कि सालों बाद नगर निगम को इस नियम की याद क्यों आई। अब निगम 2021में हुए संशोधन के आधार पर अभी तक जारी की गई भवन अनुमति और कॉलोनी विकास अनुमति में नोटिस जारी कर यह राशि वसूल करेगा। इसे लेकर शहरभर के बिल्डर-कालोनाइजर भडक़े हुए हैं। उनका कहना है कि पहले सेही भारी-भरकम अनुज्ञा शुल्क सहित अन्य राशि जमा करा ली जाती है और उसके बाद जो प्रोजेक्ट बनाकर वे बेच चुके हैं उनमें अब लाखों-करोड़ों रुपए की राशि कैसे चुकाएंगे और 5 साल पुराने आदेश पर अभी तक अमल क्यों नहीं किया गया। आज सुबह साढ़े 3 बजे क्रेडाई ने निगम की जबरिया वसूली को लेकर बैठक भी बुलाई है। क्रेडाई पदाधिकारियों का कहना है कि निगम के इस फैसले को अदालत में भी चुनौती दी जाएगी।
केविएट दाखिल
इंदौर नगर निगम द्वारा इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए पहल कर दी गई है और इस नई व्यवस्था के खिलाफ न्यायालय में जाकर स्थगन प्राप्त करने की संभावना को समाप्त करने के लिए केविएट दाखिल कर दी गई है। इस केविएट को लगाए जाने की सार्वजनिक सूचना भी निगम द्वारा आज जारी कर दी गई।
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