
इंदौर, विकाससिंह राठौर।
रम (Rum) के लिए ओल्ड मोंक (Old Monk) नाम का चहेता ब्रांड (Brand) पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र (Maharashtra) के कई शहरों में अचानक बाजार से गायब होने लगा। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खोपोली स्थित फैक्ट्री से लिए गए तीन वेरिएंट के सैंपलों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया था। इसके बाद इस फैक्ट्री में निर्मित तीनों वेरिएंट की ओल्ड मोंक की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। कंपनी ने इस कार्रवाई को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामला अभी विचाराधीन है।
पूरा मामला 11 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जब एफएसएसएआई की केंद्रीय टीम ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खोपोली स्थित मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड की फैक्ट्री का निरीक्षण कर यहां से छह उत्पादों के नमूने लिए। जांच दस्तावेजों के अनुसार ओल्ड मोंक ट्रिपल एक्स रम, ओल्ड मोंक गोल्ड रिजर्व रम और ओल्ड मोंक द लीजेंड रम के नमूनों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके बाद कंपनी को सुधार नोटिस, कारण बताओ नोटिस और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। कई दौर की सुनवाई और जवाबों के बाद 18 मई 2026 को तीनों उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि भविष्य में ऐसे उत्पादों का उत्पादन रोकने तथा मौजूदा स्टॉक को री-लेबलिंग कर लेबलिंग नियमों का पालन करते हुए बेचने के निर्देश दिए गए। रम सहित सभी शराबों को बनाने की अलग-अलग विधि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय है। इसी विधि से तैयार किए जाने पर किसी शराब को रम, व्हिस्की, वोद्का, जिन, बीयर सहित अन्य श्रेणियों में रखा जाता है। इसमें स्पिरिट की प्रकृति, उसकी मात्रा, एजिंग और अन्य मानक महत्वपूर्ण होते हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आया कि ओल्ड मोंक रम में 7 साल पुरानी रम मिलाने का दावा किया गया था, जबकि उसकी मात्रा 5 से 10 प्रतिशत के बीच थी। वहीं शेष 90 से 95 प्रतिशत तक न्यूट्रल अल्कोहल थी, जिसका उपयोग देसी शराब सहित अन्य प्रकार की शराब बनाने में भी किया जाता है। साथ ही इसमें फ्लेवर मिलाकर रम जैसा स्वाद तैयार किए जाने की बात भी सामने आई है। इन्हीं निष्कर्षों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ओल्ड मोंक रम के मानकों पर खरी नहीं उतरती है? क्या यह रम ही नहीं है? हालांकि कंपनी ने एफएसएसएआई के ऐसे सभी निष्कर्षों को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
जिसे सात साल पुरानी बताई… वो सात दिन पुरानी भी नहीं निकली
जांच के दौरान सबसे बड़ी आपत्ति उत्पादों पर लिखे 7 ईयर्स ओल्ड ब्लेंडेड दावे को लेकर दर्ज की गई। एफएसएसएआई अधिकारियों का कहना है कि अल्कोहलिक पेय पर उम्र (एज क्लेम) का उल्लेख निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जा सकता है और संबंधित उत्पादों पर किया गया दावा मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। दूसरी महत्वपूर्ण आपत्ति लेबल पर फ्लेवर एड करने के उल्लेख को लेकर थी, जबकि रम में अलग से कोई फ्लेवर नहीं मिलाया जा सकता है। विभाग का कहना है कि रम की पहचान और लेबलिंग से जुड़े मानकों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर तीनों नमूनों को मानकों के अनुरूप नहीं माना गया और सैंपल फेल होने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
कंपनी ने खुद अपनी बॉटल पर लिखा… शराब में मिला है आर्टिफिशियल रम फ्लेवर
अग्निबाण ने इंदौर से भी ओल्ड मोंक की बॉटल की जांच की। इसमें कंपनी द्वारा अपनी बॉटल की पैकिंग पर लगे स्टीकर पर भी साफ लिखा मिला कि एडेड नेचुरल आईडेंटिकल एंड आर्टिफिशियल रम फ्लेवरिंग सब्सटेंस यानी इसमें प्राकृतिक के समान तथा कृत्रिम रम स्वादवर्धक पदार्थ मिलाए गए हैं। यानी कंपनी खुद फ्लेवर मिलाने की पुष्टि करती है। सैंपल के फेल होने का सबसे प्रमुख कारण भी यही था, क्योंकि रम में अलग से फ्लेवर मिलाना प्रतिबंधित है।
पूरे देश में की जा रही जांच, इंदौर से भी लिए सैंपल
एफएसएसएआई ने इस कार्रवाई के बाद देशभर में शराब उत्पादों की जांच और सैंपलिंग अभियान भी तेज कर दिया है। रम सहित अन्य अल्कोहलिक पेय बनाने वाली कंपनियों के उत्पादों की गुणवत्ता, लेबलिंग और मानकों की जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह अभियान किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है। एफएसएसएआई ने देशभर में कई बड़े ब्रांडों के उत्पादों की भी जांच शुरू कर दी है। इसी कड़ी में हाल ही में इंदौर में भी एफएसएसएआई की टीम ने विभिन्न कंपनियों के शराब उत्पादों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कंपनी ने कोर्ट में दाखिल की याचिका
एफएसएसएआई की इस कार्रवाई के खिलाफ कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। इसमें कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उसने एफएसएसएआई के सभी नोटिसों का जवाब दिया, आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए तथा सुधारात्मक कदम भी उठाए। इसके बावजूद बिक्री पर रोक लगा दी गई। कंपनी का दावा है कि इस कार्रवाई से उसका तैयार स्टॉक फंस गया, सप्लाई चेन प्रभावित हुई और उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। कंपनी ने प्रतिबंध आदेश रद्द करने की मांग की है। मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है। अब उसकी गुणवत्ता और लेबलिंग पर उठे सवालों का अंतिम जवाब बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले से ही मिलेगा।
एक नजर पूरे घटनाक्रम पर
एफएसएसएआई ने शराब कंपनियों को जारी किए नोटिस
इस घटना के बाद एफएसएसएआई ने शराब निर्माताओं को नोटिस भी जारी किए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया है कि अल्कोहलिक पेय पर एज क्लेम, लेबलिंग और फ्लेवर से जुड़े सभी दावे निर्धारित मानकों के अनुरूप होने चाहिए। अनधिकृत फ्लेवर का उपयोग, भ्रामक एज क्लेम और ब्लेंड की उम्र से जुड़े गलत दावे नियमों का उल्लंघन माने जाएंगे। ऐसे मामलों में संबंधित उत्पादों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या है रम की परिभाषा?
एफएसएसएआई के अनुसार रम एक डिस्टिल्ड मादक पेय है, जिसे गन्ने के रस, गन्ने के शीरे (मोलासेस) या गन्ने से बने अन्य उत्पादों के फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन से प्राप्त अल्कोहल से तैयार किया जाता है। इसमें रम का विशिष्ट प्राकृतिक स्वाद और सुगंध होना अनिवार्य है। रम में कैरेमल के अलावा किसी अन्य रंग का उपयोग नहीं किया जा सकता। सफेद रंग की रम को व्हाइट रम कहा जाता है। साथ ही उत्पाद का निर्माण, लेबलिंग और उस पर किए गए सभी दावे एफएसएसएआई के निर्धारित मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है।
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