
भोपाल। मध्य प्रदेश में शहरी विकास की रफ्तार मास्टर प्लान की देरी के कारण धीमी पड़ गई है। सरकार भले ही मध्य प्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के जरिए महानगरीय क्षेत्रों के विकास को नई दिशा देने की तैयारी कर रही हो, लेकिन भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों में नए मास्टर प्लान अब तक लागू नहीं हो सके हैं। इसका सीधा असर भूमि उपयोग (लैंड यूज), नई आवासीय योजनाओं और शहरी विस्तार पर पड़ रहा है।
पांच साल से अधिक समय से पुराने प्लान पर शहर
प्रदेश के कई प्रमुख शहर आज भी पुराने मास्टर प्लान के आधार पर संचालित हो रहे हैं। इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के मास्टर प्लान की अवधि वर्ष 2021 में समाप्त हो चुकी है। भोपाल का वर्तमान मास्टर प्लान वर्ष 2005 में लागू हुआ था, जिसे उस समय की लगभग 10 से 15 लाख आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसकी वैधता भी कई वर्ष पहले समाप्त हो चुकी है, लेकिन नया मास्टर प्लान अब तक लागू नहीं हो पाया। इस कारण तेजी से बढ़ती आबादी और बदलती शहरी जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
2047 की जरूरतों के अनुसार बनेगा नया प्लान
सरकार का दावा है कि भोपाल का नया मास्टर प्लान वर्ष 2047 की अनुमानित आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। पहले तैयार किए गए ड्राफ्ट मास्टर प्लान पर प्राप्त दावे, आपत्तियों और सुझावों के बाद अब इसे नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने भी पुराने प्रारूप के कई प्रावधानों पर असहमति जताते हुए संशोधन की मांग की थी। हालांकि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नए मास्टर प्लान की घोषणा किए जाने के बावजूद इसे अंतिम रूप मिलने में लगातार देरी हो रही है।
देरी से बढ़ रही अवैध कॉलोनियां
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि मास्टर प्लान समय पर लागू नहीं होने का सबसे बड़ा नुकसान अनियोजित शहरी विस्तार के रूप में सामने आ रहा है। स्पष्ट भूमि उपयोग नीति नहीं होने से कई क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का विकास तेजी से हो रहा है, जिससे भविष्य में सड़क, सीवरेज, जलापूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का होगा व्यापक विस्तार
सरकार ने भोपाल और इंदौर महानगरीय क्षेत्रों का दायरा भी काफी बढ़ाया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र लगभग 13 हजार वर्ग किलोमीटर में फैलेगा। इसमें भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम के नगरीय निकायों के साथ करीब 2,510 गांव शामिल किए गए हैं। वहीं इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का दायरा लगभग 16 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम के नगरीय निकायों के साथ करीब 2,781 गांव शामिल किए गए हैं।
विकास की असली रफ्तार मास्टर प्लान से
सरकार ने मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी को अधिक अधिकार देने की पहल जरूर की है, लेकिन शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नए मास्टर प्लान लागू नहीं होते, तब तक भूमि उपयोग, नई टाउनशिप, औद्योगिक क्षेत्र और आधारभूत ढांचे से जुड़ी अधिकांश बड़ी परियोजनाएं पूरी गति नहीं पकड़ पाएंगी। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रदेश के प्रमुख शहरों के नए मास्टर प्लान कब अंतिम रूप लेकर लागू होते हैं।
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