
जनगणना के प्रथम चरण के आंकड़ों के आधार पर पूरे शहर में जांच शुरू
इंदौर। नगर निगम (Municipal corporation) द्वारा जनगणना (Census) के प्रथम चरण (First Phase) में की गई मकान गणना के आंकड़ों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। इस जांच में 24 घंटे में ही 350 नई संपत्ति (350 new properties) निगम को मिल गई हंै।
अग्निबाण द्वारा सबसे पहले यह समाचार प्रकाशित किया गया था कि भारत सरकार द्वारा जनगणना के प्रथम चरण में जो मकान गणना करवाई गई है, उसमें इंदौर शहर में मकान के जो आंकड़े सामने आए हैं उसके आधार पर अब नगर निगम द्वारा जांच की जाएगी। जनगणना में जिस पते पर जिस व्यक्ति का मकान मिला है उसे निगम के रिकॉर्ड में चेक किया जाएगा। यदि वह मकान निगम के रिकॉर्ड में संपत्तिकर के खाते में नहीं है तो फिर निगम की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी। इस कार्य को अंजाम देने के लिए हर जोनल कार्यालय के क्षेत्र में विशेष दल का गठन भी किया गया है।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार नगर निगम की टीम द्वारा जांच कार्य शुरू कर दिया गया है। शुरुआत के 24 घंटे में ही जांच के दौरान 350 ऐसी संपत्ति मिल गई हैं, जिनका नगर निगम के रिकॉर्ड में संपत्तिकर जमा करने का खाता ही नहीं है। अब इन संपत्ति का खाता खोलने और उनके टैक्स की गणना करने का काम शुरू किया जा रहा है। इसमें देखा जाएगा कि जिस मकान का संपत्तिकर का खाता नहीं है वह मकान कब बना था। इसके लिए यदि मकान वैध कॉलोनी में बना हुआ है तो उसकी नक्शा मंजूरी की तिथि को देखा जाएगा। यदि अवैध कॉलोनी में बना हुआ है तो बिजली कनेक्शन के आधार पर मालूम किया जाएगा कि मकान का कब से उपयोग किया जा रहा है। इस आधार पर टैक्स की गणना करते हुए संबंधित व्यक्तियों से टैक्स राशि की वसूली की कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिक तौर पर यह अनुमान निकालकर सामने आया है कि जनगणना की मकान गणना के आंकड़े और नगर निगम के संपत्तिकर में दर्ज संपत्ति के आंकड़े में एक लाख से ज्यादा मकान का अंतर है। ऐसे में संभव है कि जनगणना के आंकड़ों से जांच करने पर नगर निगम की लॉटरी लग जाए। निगम को इतनी बड़ी संख्या में टैक्स नहीं देने वाली संपत्ति मिल जाए कि उनसे मिलने वाले टैक्स से निगम अपनी माली हालत में सुधार कर सके।
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