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रादुविवि में दो सप्ताह से प्रवेश प्रभारी का पद है रिक्त , अंतिम दिन पंजीयन के बाद अटकी प्रक्रिया

August 19, 2026

  • प्रवेश व्यवस्था के समन्वय पर उठे सवाल, जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से विभाग भी असमंजस में

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रवेश जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया पिछले करीब दो सप्ताह से बिना प्रवेश प्रभारी के ही चलती रही। पूर्व प्रवेश प्रक्रिया प्रभारी आचार्य प्रो. सुरेंद्र सिंह के 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक किसी अन्य प्राध्यापक को इस जिम्मेदारी का प्रभार नहीं सौंप सका है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय में 14 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया जारी रही। अब अंतिम दिन पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों के सत्यापन और सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया अटकने से विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई है।



  • जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों में प्रवेश प्रक्रिया के अंतिम दिन यानी 14 अगस्त को विभिन्न पाठ्यक्रमों में कई विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया। नियमानुसार पंजीयन के बाद संबंधित विद्यार्थियों के दस्तावेज और आवेदन का सत्यापन किया जाना है। इसके बाद उपलब्ध सीटों के आधार पर अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होनी है।बताया जा रहा है कि अंतिम दिन पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों के मामले में पोर्टल पर सत्यापन और सीट अलॉटमेंट से संबंधित आवश्यक विकल्प प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। इसके कारण संबंधित शिक्षण विभाग आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। विद्यार्थी प्रवेश की स्थिति जानने के लिए विभागों के चक्कर लगा रहे हैं, जबकि विभागीय स्तर पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
    विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया के संचालन, विभिन्न शिक्षण विभागों के बीच समन्वय और प्रवेश से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में प्रवेश प्रभारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में पूर्व प्रभारी के सेवानिवृत्त होने के बाद तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था किया जाना जरूरी था। लेकिन 31 जुलाई के बाद करीब दो सप्ताह तक यह जिम्मेदारी रिक्त रही और इसी अवधि में प्रवेश प्रक्रिया अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलती रही। अब अंतिम दिन पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों की प्रक्रिया तकनीकी अथवा प्रशासनिक स्तर पर रुकने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि पोर्टल पर सत्यापन और अलॉटमेंट के विकल्प तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं हैं, तो विश्वविद्यालय को समय रहते संबंधित एजेंसी अथवा पोर्टल प्रबंधन से समन्वय कर समस्या दूर करनी चाहिए थी।

    विभागों को भी नहीं मिल रही स्पष्टता
    प्रवेश प्रभारी के पद के रिक्त रहने का असर केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। संबंधित शिक्षण विभाग भी प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरण को लेकर असमंजस में हैं। पंजीयन के बाद सत्यापन और सीट आवंटन की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी नहीं होने पर विद्यार्थियों के प्रवेश की स्थिति प्रभावित हो सकती है। प्रवेश जैसी समयबद्ध प्रक्रिया में प्रत्येक चरण एक-दूसरे से जुड़ा होता है। पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, मेरिट अथवा पात्रता परीक्षण और सीट अलॉटमेंट में किसी एक स्तर पर देरी होने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर प्रभारी पद को खाली रखना विश्वविद्यालय की प्रवेश व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़ा करता है।

    सेवानिवृत्ति की तारीख पहले से तय, फिर भी नहीं हुई वैकल्पिक व्यवस्था
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि पूर्व प्रवेश प्रभारी के 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले से थी। इसके बावजूद उनके स्थान पर नई जिम्मेदारी तय नहीं की गई। प्रवेश प्रक्रिया अगस्त के मध्य तक जारी रहनी थी, ऐसे में प्रभारी की नियुक्ति अथवा वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही की जा सकती थी। अब अंतिम दिन पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों की प्रक्रिया अटकने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तत्काल व्यवस्था बहाल करने की चुनौती है। विद्यार्थियों को समय पर सत्यापन और सीट अलॉटमेंट की सुविधा नहीं मिली तो प्रवेश सत्र की आगे की प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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