
जबलपुर। कभी अपराध की राह पर बढ़े हाथ अब आस्था, कला और पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर गढ़ रहे हैं। सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय कारागार में सजा काट रहे बंदियों ने गणेश उत्सव के लिए मिट्टी, गोबर और तुलसी के बीज से इको-फें्रडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं का विसर्जन करने के बाद ये कचरे में तब्दील होने के बजाय तुलसी के पौधे के रूप में नया जीवन देंगी।
हुनर ने बदली सोच, जेल से बाहर भी रोजगार की उम्मीद
काष्ठकला से पावरलूम तक सिखाए जा रहे कई हुनर
जेल प्रशासन बंदियों को केवल सजा काटने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें हुनरमंद बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। जेल में काष्ठकला, फैब्रिकेशन, हथकरघा, पावरलूम, दरी और स्टेशनरी निर्माण जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है। बंदियों द्वारा गमछा, टॉवल, दरी, कारपेट सहित विभिन्न हस्तनिर्मित सामग्री भी तैयार की जाती है।
जो हाथ अपराध की ओर बढ़े, अब सुधार की दिशा में काम कर रहे
जेल उप अधीक्षक मदन कमलेश ने बताया कि गणेश उत्सव को देखते हुए इस वर्ष भी बंदियों ने इको-फे्रंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। 12 बंदियों की टीम ने करीब एक महीने में 150 प्रतिमाएं बनाई हैं। उन्होंने कहा कि पहले जो हाथ अपराध की ओर बढ़ते थे, अब वही हाथ सुधार और रचनात्मकता की दिशा में काम कर रहे हैं। बंदियों ने पूरी मेहनत और लगन से प्रतिमाएं तैयार की हैं। करीब 500 रुपए में बिकने वाली प्रतिमाओं से प्राप्त राशि बंदी कल्याण कोष में जमा की जाएगी। जेल प्रशासन के अनुसार, बंदियों को अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण देने का उद्देश्य उन्हें सजा के साथ सुधार और पुनर्वास का अवसर देना है, ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वे सीखे हुए हुनर के जरिए सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन शुरू कर सकें।
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