
इंदौर। अब प्रदेश के 55 जिलों में कहीं भी अचल सम्पत्ति की रजिस्ट्री करवाई जा सकेगी। शासन ने इस आशय का गजट नोटिफिकेशन करते हुए क्षेत्रीय सीमा बंधन समाप्त कर दिया। यानी अब इंदौर से ही उप पंजीयक कार्यालयों के माध्यम से प्रदेश के किसी भी जिले में खरीदी सम्पत्ति की रजिस्ट्री बिना वहां जाए करवाई जा सकेगी। 17 सितम्बर से यह सुविधा प्रदेशभर में उपलब्ध हो जाएगी। सम्पदा-2.0 पोर्टल के माध्यम से किसी भी जिले का उप पंजीयक अन्य जिले की सम्पत्ति की रजिस्ट्री कर सकेगा। स्लॉट बुकिंग के बाद 6 दिन का समय दस्तावेजों की जांच के लिए मिलेगा। उसके बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया सम्पन्न कराई जाएगी।
पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मगर इसके लिए जिस क्षेत्र में सम्पत्ति मौजूद है उससे जुड़े उप पंजीयक कार्यालय जाकर ही रजिस्ट्री निष्पादित करवाना पड़ती रही है। पहले सम्पदा पोर्टल-1.0 शुरू किया गया, जिसमें परिवर्तन करते हुए अभी 1 अप्रैल से पोर्टल-2.0 के जरिए रजिस्ट्री की जाने लगी है। पहले प्रयोग के रूप में साइबर तहसील के माध्यम से किसी अन्य जिले की रजिस्ट्री करवाने की शुरुआत की गई। मगर अब उसे इंदौर सहित सभी 55 जिलों में लागू कर दिया है। इसकी पुष्टि करते हुए इंदौर के वरिष्ठ पंजीयक अमरेश नायडू ने बताया कि अभी वाणिज्यकर विभाग ने इस आशय का गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया है, जिसमें पंजीयक एवं मुद्रांक विभाग में पदस्थ पंजीयन अधिकारियों की क्षेत्रीय अधिकारिता राज्य के सभी उप जिलों पर विस्तारित कर दी गई है।
यानी अब सम्पत्ति की रजिस्ट्री के लिए पूरे मध्यप्रदेश में क्षेत्रीय सीमा बंधन समाप्त हो गया है और सम्पदा-2.0 पोर्टल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति प्रदेश में कहीं से भी अपनी सुविधा के मुताबिक रजिस्ट्री करवा सकेगा। अब सम्पत्ति जिस जिले में है उसके लिए जरूरी नहीं होगा कि रजिस्ट्री भी उसी जिले में हो। किसी भी जिले का सब रजिस्ट्रार यानी उप पंजीयक अन्य जिले की सम्पत्ति की रजिस्ट्री कर सकेगा, जिसमें फेसलेस ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा भी आने वाले समय में मिलेगी। अभी 17 सितम्बर से इंदौर सहित प्रदेशभर के सभी 55 जिलों में यह सुविधा मिल जाएगी। यानी इंदौर के किसी व्यक्ति को अगर मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, नीमच या किसी अन्य स्थान पर अपनी खरीदी हुई सम्पत्ति की रजिस्ट्री करवाना है तो उसे उस शहर या जिले में नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि वह इंदौर के ही उप पंजीयक दफ्तर से रजिस्ट्री करवा सकेगा। इसके लिए जब स्लॉट बुक होगा तो उसके बाद 6 दिन का समय उप पंजीयक को मिलेगा, जिसके चलते वह दस्तावेज और मौके की स्थिति की जानकारी ले सकेगा और अगर दस्तावेज सही हैं तो सातवें दिन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
पंजीयन के अधिकार देने का पटवारियों ने किया विरोध भी
इंदौर सहित प्रदेशभर में 48 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को स्वामित्व योजना का लाभ देते हुए इनकी मुफ्त रजिस्ट्रियां करवाई जाएगी। इसके लिए तहसीलदार से लेकर पटवारियों को अधिकार दिए गए हैं। पटवारियों का विरोध है कि नाम निष्पादक के रूप में वे भविष्य की कानूनी जवाबदेही के चक्कर में फंस सकते हैं। अभी जो रजिस्ट्री करवा दी और बाद में अगर कब्जे, सस्वामित्व, चतुर्सीमा, पुराने दावे या लम्बित विवाद जैसे मामले सामने आए तो पटवारियों को जबरन कोर्ट-कचहरी और जांच का सामना करना पड़ेगा, जिसके चलते पटवारियों का कहन ा है कि पंजीयन करवाने से पूर्व तैयार अधिकार अभिलेखों का गांव-गांव में सार्वजनिक सत्यापन कराया जाए और बकायदा मुनादी, सार्वजनिक सूचना और शिविर लगाकर अभिलेख दिखाए जाएं, ताकि आपत्ति भी आ सके और सुधार का पर्याप्त अवसर मिले और उसके बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उल्लेखनीय है कि कल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए 17 सितम्बर से स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन की शुरुआत करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें रोजाना 30 से 40 रजिस्ट्रियां सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायकों को मिलकर शिविर के माध्यम से करवाना पड़ेगी। पंचायत स्तर पर पटवारी को निष्पादन अधिकारी बनाया गया है और पंजीयन अधिकारी के रूप में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक व अन्य को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। 41 हजार 568 गांवों के 68 लाख 47 हजार प्लाटों का सर्वे करवाया गया और अब 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर ये नि:शुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू की जाना है।
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