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क्या बाबा बागेश्वर सच में सोने की खड़ाऊ पहनते हैं? बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’

September 21, 2026

छतरपुर। बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Peethadhishwar Dhirendra Krishna Shastri) की खड़ाऊ इन दिनों चर्चा में है। मुकेश अंबानी के घर गणेश उत्सव के दौरान उनकी सुनहरे रंग की खड़ाऊ (Wooden sandals) नजर आने के बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने का बताया जाने लगा। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी खड़ाऊ लकड़ी की हैं और उन पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है।

अब इस विवाद पर एक बार फिर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने अपने अंदाज में कहा है कि अगर लोग सोने की खड़ाऊ की चर्चा करते रहेंगे तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे।

बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करेंगे’

छतरपुर में कथा के दौरान खड़ाऊ को लेकर उठ रहे सवालों पर धीरेंद्र शास्त्री ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि अगर उनकी सोने की खड़ाऊ का जिक्र किया गया तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे। उन्होंने कहा कि वह ऐसे बाबा नहीं हैं जो इस तरह की बातों से डर जाएं। उनके इस बयान की रिपोर्ट 20 सितंबर को प्रकाशित हुई है।


‘हम माया-मोह छोड़ने वाले बाबा नहीं’

धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि वह माया-मोह छोड़ने का प्रवचन नहीं देते। उनके अनुसार, उनका संदेश यह है कि व्यक्ति माया-मोह में रहते हुए खूब कमाए और उस धन का इस्तेमाल परमात्मा की ओर बढ़ने में करे।

उन्होंने कहा कि वह ऐसी बातों में दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहते और जो बात है, उसे उसी रूप में कहेंगे।

अंबानी के घर जाने के बाद शुरू हुई थी चर्चा

सोने की खड़ाऊ को लेकर चर्चा उस समय शुरू हुई, जब धीरेंद्र शास्त्री को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया में गणेश उत्सव के दौरान देखा गया। तस्वीरों और वीडियो में उनके पैरों में सुनहरे रंग की खड़ाऊ दिखाई दीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने की खड़ाऊ बताया जाने लगा।

हालांकि, उपलब्ध तस्वीरों और अन्य रिपोर्टों में इन खड़ाऊ के लकड़ी की होने और उन पर सुनहरी फिनिश होने की जानकारी सामने आई है। इन्हें वास्तव में सोने से बना होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



  • पहले भी दे चुके हैं सफाई

    धीरेंद्र शास्त्री इस मामले में पहले भी सफाई दे चुके हैं। उनका कहना था कि खड़ाऊ लकड़ी की है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई थी कि सिर्फ रंग के आधार पर इसे सोने की खड़ाऊ बताया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इतना ज्ञान है कि सोना पैरों में पहनने की चीज नहीं है। बाद में इसी विवाद पर ताजा प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में डायमंड की खड़ाऊ बुक करने की बात कही।

    इस तरह फिलहाल ‘सोने की खड़ाऊ’ का दावा धीरेंद्र शास्त्री के अपने बयान के मुताबिक सही नहीं है। उनके अनुसार खड़ाऊ लकड़ी की है, जबकि सुनहरे रंग के कारण उसके सोने की होने की चर्चा शुरू हुई।

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