
कुएं में गिरकर लकवे से पीड़ित तेंदुआ 116 दिनों बाद सुबह भोपाल वन विहार को रवाना
इन्दौर। इस साल 11 जनवरी को इंदौर (Indore) के उमरियाखुर्द ( Umariya Khurd) गांव में क्रिसेंट वाटर पार्क (Crescent Water Park) के पास कुएं में गिरे जिस तेंदुए (leopard) का रेस्क्यू कर रालामण्डल में पिंजरे में रखा था, 116 दिनों बाद आज अलसुबह 6 बजे उसे मध्यप्रदेश के सबसे बड़े एनिमल रेस्क्यू सेंटर भोपाल वन विहार के लिए रवाना किया गया है । सम्पूर्ण सुरक्षा के साथ तेंदुए को वन विहार तक छोड़ने की जिम्मेदारी इंदौर डीएफओ ने रालामण्डल रेस्क्यू टीम के मुख्य अधिकारी सहित 5 अन्य वन कर्मचारियों को दी है।
आज सुबह भोपाल वन विहार भेजने के पहले 2 मई को इंदौर चिड़ियाघर के सीनियर डाक्टर उत्तम यादव ने तेंदुए का सम्पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण कर जो मेडिकल रिपोर्ट दी है। उसमें बताया कि इतने दिनों तक चले इलाज के बाद तेंदुए की हालत में बहुत सुधार है। उसका वजन भी बढ़ चुका है, मगर कुएं में ऊंचाई से गिरने की वजह से उसके कमर का हिस्से सहित पिछले दोनों पैर अभी भी पैरालाइज है मतलब लकवे से पीड़ित है । इसलिए यह तेन्दुआ अब किसी का शिकार करने के काबिल नही ंहै । इसलिए इसे जंगल मे छोड़ना कतई उचित नहीं है । इस मेडिकल रिपोर्ट के बाद डीएफओ लाल सुधाकर सिंह ने भोपाल वन विहार के अधिकारियों से लम्बी बात करते हुए उन्हें बताया कि इंदौर वन विभाग का कोई एनिमल रेक्सयू सेंटर नहीं है, इसके बावजूद पिछले लगभग 4 माह से तेंदुए को रालामण्डल अभयारण्य में पिंजरे में रखकर उसका इलाज करवाते आ रहे हैं, मगर अब डाक्टर्स का कहना है कि इसे पिंजरे की जगह खुले बाड़े में रखना जरूरी है। इसके बाद वन विहार ने तेंदुए को भोपाल भेजने की मंजूरी दे दी । मंजूरी मिलते ही इंदौर डीएफओ ने रेस्क्यू टीम प्रमुख फॉरेस्ट रेंजर योगेश यादव के नेतृत्व में शेर सिंह कटारा, राकेश सोनया, हरीश योगी रमेश अजनार वनकर्मियों की सुरक्षा में तेंदुए को सुबह 6 बजे रालामण्डल अभयारण्य से रवाना कर दिया ।
11 जनवरी को कुएं में गिरा मिला था तेंदुआ
आज भोपाल रवाना किया गया तेंदुआ 11 जनवरी को उमरिया खुर्द गांव में क्रिसेेंट वाटरपार्क के पास लगभग 40 फीट कुएं में गिरा मिला था। गांव वालों की सूचना पर इंदौर वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर महू वेटरनरी हास्पिटल में जांच कराई थी। जांच के बाद वेटरनरी डाक्टर ने तेंदुए के पिछले हिस्से के पैरालाइज होने की रिपोर्ट देते हुए लेजर थैरेपी से इलाज करने की सलाह दी थी । इसके बाद इसकी लेजर थैरेपी की जाती रही, मगर इन्दौर में खुला बाड़ा नही होने की वजह 24 घण्टे पिंजरे में ही रखना पड़ा । इस कारण लेजर थैरेपी के बावजूद लकवा ग्रस्त हिस्से में ज्यादा सुधार नही हुआ । वन अधिकारियों को उम्मीद है कि वन विहार में खुले बाड़े में रहने के कारण सुधार सम्भव है।
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