
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के देशभर में चले विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया (Social Media) पर फर्जी और भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला सामने आया है. महाराष्ट्र साइबर (Maharashtra Cyber) की तरफ से दावा किया गया है कि इसे लेकर टेक्नोलॉजी की मदद से विशेष मॉनिटरिंग अभियान चलाया गया.इसमें ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT), मेटाडेटा, सोशल मीडिया अकाउंट्स के व्यवहार और AI से तैयार डीपफेक कंटेंट की फॉरेंसिक जांच की गई।
जांच के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के एक ऐसे नेटवर्क की पहचान की, जो गलत, भ्रामक और AI से तैयार कंटेंट फैला रहा था. महाराष्ट्र साइबर के मुताबिक, इसका मकसद लोगों की राय को प्रभावित करना, भ्रम पैदा करना, अशांति भड़काना और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना था।
तकनीकी जांच में सामने आया कि इस तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने में भारत के बाहर मौजूद असामाजिक तत्व भी शामिल थे. इनमें खास तौर पर पाकिस्तान और मिडिल ईस्ट के कुछ देशों से संचालित अकाउंट्स की भूमिका सामने आई है. ये अकाउंट्स भारतीय यूजर्स को निशाना बनाकर भ्रामक नैरेटिव को आगे बढ़ा रहे थे. महाराष्ट्र साइबर ने संबंधित अकाउंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की।
एआई से कंटेंट बनाए गए थे
मॉनिटरिंग के दौरान Instagram, X, Facebook और YouTube समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर 429 आपत्तिजनक पोस्ट और हैंडल की पहचान की गई. तकनीकी जांच में करीब 100 अकाउंट भारत के बाहर से संचालित पाए गए. वहीं, 140 से ज्यादा पोस्ट और प्रोफाइल में AI से तैयार या AI की मदद से बनाए गए कंटेंट का इस्तेमाल सामने आया.
फर्जी वीडियो और क्लोन की गई आवाज
महाराष्ट्र साइबर के मुताबिक, जांच में भीड़ को डिजिटल तरीके से वास्तविकता से ज्यादा दिखाने वाली तस्वीरें, सिंथेटिक आवाज, क्लोन ऑडियो और सार्वजनिक हस्तियों के नाम से फैलाए गए छेड़छाड़ वाले वीडियो मिले. एक केंद्रीय मंत्री से जुड़े AI जनरेटेड कंटेंट की जांच में ऑडियो में 100 फीसदी कॉन्फिडेंस के साथ हेरफेर का पता चला, जो सिंथेटिक या क्लोन की गई आवाज की ओर इशारा करता है. वीडियो की जांच में करीब 82 फीसदी कॉन्फिडेंस के साथ हेरफेर पाया गया. जांच किए गए 11 वीडियो सेगमेंट में से 9 को संदिग्ध पाया गया।
महाराष्ट्र साइबर ने लोगों से संवेदनशील घटनाओं से जुड़े फोटो, वीडियो या मैसेज को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील की है. एजेंसी ने कहा कि गलत जानकारी, डीपफेक और गैरकानूनी डिजिटल कंटेंट फैलाने वाले लोगों और संगठित नेटवर्क के खिलाफ मॉनिटरिंग और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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