
नई दिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने गुरुवार को चुनाव आयोग (election Commission) से जवाब मांगा है कि क्या तमिलागा वेत्री कड़गम (TVK) ने 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान वोट मांगने के लिए बच्चों का इस्तेमाल किया था। यह मामला मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या भ्रष्ट आचरण के मामलों में किसी राजनीतिक दल को भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार को तो अयोग्य ठहराया जा सकता है, लेकिन क्या किसी पार्टी पर भी ऐसी कार्रवाई संभव है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मामला ‘वोट के बदले पैसे’ और बच्चों का इस्तेमाल कर वोट मांगने से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि TVK ने चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल किया।
विजय के भाषण का भी किया गया जिक्र
याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद भी विजय ने अपने संबोधन में बच्चों का धन्यवाद किया था। कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है और इसकी जांच जरूरी है। इसके बाद चुनाव आयोग के वकील को निर्देश दिया गया कि वह इस मामले में आयोग से निर्देश लेकर जवाब पेश करें।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता वासुकी ने दायर की है। इसमें TVK के साथ-साथ डीएमके और एआईएडीएमके पर भी चुनाव में भ्रष्ट आचरण और वोट के बदले पैसे बांटने के आरोप लगाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने और चुनाव प्रचार के लिए बच्चों का इस्तेमाल किया गया। याचिकाकर्ता ने 21 अप्रैल को चेन्नई के YMCA ग्राउंड में हुई विजय की एक सभा का जिक्र किया।
आरोप है कि वहां विजय ने बच्चों से कहा था कि वे अपने माता-पिता को वोटिंग के लिए भावनात्मक रूप से प्रभावित करें। याचिका के अनुसार, इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए, जिनमें बच्चे अपने माता-पिता और दादा-दादी पर वोट को लेकर दबाव बनाते दिखाई दिए।
चुनाव आयोग के पुराने निर्देशों का हवाला
याचिका में चुनाव आयोग के 2009, 2013, 2014 और 2017 के निर्देशों का भी हवाला दिया गया। इन निर्देशों में कहा गया था कि चुनावी प्रक्रिया या प्रचार में बच्चों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि शिकायतें, वीडियो और मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बावजूद चुनाव आयोग और तमिलनाडु के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कोई प्रभावी जांच नहीं की। याचिका में मांग की गई है कि TVK, डीएमके और एआईएडीएमके के खिलाफ लगे चुनावी भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
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