
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी लाइसेंस निलंबन के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह कार्रवाई बिना उचित मूल्यांकन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना की गई, इसलिए इसे अवैध माना जाता है। न्यायमूर्ति दीपक खोते की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि रूष्टढ्ढ ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का सही ढंग से परीक्षण नहीं किया और जल्दबाजी में निर्णय ले लिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सुनना जरूरी होता है। दरअसल, डॉ. हर्ष सक्सेना, डॉ. आलोक अग्रवाल सहित अन्य डॉक्टरों के लाइसेंस को 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया था। यह कार्रवाई एमसीआई के निर्देश पर मेडिकल काउंसिल द्वारा की गई थी।
डॉक्टरों ने पेश किए सबूत
डॉक्टरों की ओर से अधिवक्ता सुमित रघुवंशी ने पक्ष रखते हुए कहा कि यात्रा का खर्च डॉक्टरों ने खुद उठाया था। इस संबंध में बैंक ट्रांजेक्शन के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि एमसीआई के आदेश में कई गंभीर खामियां हैं और यह विधिसम्मत नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने लाइसेंस निलंबन के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद संबंधित डॉक्टरों को राहत मिली है।
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