
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने शुक्रवार को दहेज हत्या(Dowry killing) के मामलों में अभियुक्तों के बयान दर्ज करते समय अक्सर ट्रायल कोर्ट (Trial court) द्वारा गंभीरता नहीं दिखाने पर चिंता व्यक्त की है। शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने यह भी कहा है कि दहेज हत्या (Dowry killing) मामले में कभी-कभी पति के परिवारवालों को बेवजह फंसाया (Husband’s family members were unnecessarily implicated) जाता है।
कोर्ट ने कहा कि दहेज हत्या (Dowry killing)मामले का परीक्षण करते समय दुल्हन को जलाने और दहेज की मांग जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए विधायी मंशा को ध्यान में रखा जाना चाहिए। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या मामले के परीक्षण को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
चीफ जस्टिस एनवी रमना(Chief Justice NV Ramana) और जस्टिस अनिरुद्ध बोस (Justice Anirudh Bose) की पीठ ने कहा है दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा-313 के तहत दर्ज होने वाले बयान कई बार आरोपी से पूछताछ किए बिना दर्ज किए जाते हैं।
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