नई दिल्ली। पहलगाम (Pahalagaam) में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। पिछले साल हुए आतंकी हमले के बाद अब यहां पारंपरिक आईकार्ड की जगह (QR) कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू की जा रही है।
इस नई व्यवस्था के तहत टैक्सी ड्राइवर, पोनी हैंडलर, गाइड, दुकानदार और घुमंतू कामगारों को QR कोड दिया जा रहा है, जिसे उन्हें आईकार्ड की तरह पहनना होगा। इस कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही व्यक्ति की पूरी जानकारी तुरंत सामने आ जाएगी।
QR कोड स्कैन करने पर संबंधित व्यक्ति का नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार विवरण, पिन कोड और पेशे जैसी अहम जानकारी मिल जाएगी। इसे Google Lens जैसे सामान्य ऐप से भी आसानी से स्कैन किया जा सकता है।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखने के लिए तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया।
स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह देश का सबसे बड़ा पहचान अभियान माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य करीब 25 हजार लोगों को एक सिस्टम से जोड़ना है। अब तक लगभग 7 हजार लोगों को QR कोड जारी किए जा चुके हैं।
इस प्रक्रिया में पहले आवेदनकर्ता को वेरिफिकेशन फॉर्म भरना होता है, जिसके बाद पुलिस उसका बैकग्राउंड चेक करती है। पूरी जांच के बाद ही QR कोड जारी किया जाता है। जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड होता है, उन्हें यह सुविधा नहीं दी जाती।
यह QR कोड स्थानीय ‘खिदमत’ सेवा केंद्रों के जरिए बनाए जा रहे हैं। पर्यटन के लिहाज से अहम 17–18 प्रमुख स्थानों पर रहने और काम करने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस सिस्टम की खास बात यह है कि सिर्फ सुरक्षाबल ही नहीं, बल्कि पर्यटक भी QR कोड स्कैन कर सकते हैं, जिससे वे सेवाएं देने वाले व्यक्ति की पहचान आसानी से सत्यापित कर सकें।
आतंकी हमलों के बाद कुछ स्थानीय लोगों पर भी संदिग्ध भूमिका के आरोप लगे थे। पुलिस ने करीब 20 पोनी हैंडलर, गाइड और दुकानदारों से पूछताछ की थी, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने वेरिफिकेशन सिस्टम में खामियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए अब QR कोड जैसी डिजिटल व्यवस्था अपनाई गई है।
पहलगाम में करीब 3500 पोनी सर्विस से जुड़े लोग हैं, इसके अलावा बड़ी संख्या में गाइड, फोटोग्राफर और छोटे व्यापारी भी काम करते हैं। अब इन सभी को एक डिजिटल पहचान के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, पहलगाम में यह नई व्यवस्था सुरक्षा के साथ-साथ पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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