
नई दिल्ली। ईरान (Iran) के साथ जारी युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसी दबाव के बीच अमेरिका (America) ने बड़ा फैसला लेते हुए रूसी तेल (Russian Oil) खरीद पर एक बार फिर अस्थायी छूट देने का ऐलान किया है। दिलचस्प बात यह है कि यह निर्णय उस बयान के महज दो दिन बाद आया है, जिसमें अमेरिकी ट्रेजरी ने साफ संकेत दिए थे कि इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 17 अप्रैल से नई अधिसूचना जारी की है। इसके तहत देशों को 16 मई तक रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति दी गई है। यानी लगभग एक महीने तक समुद्र में लोड किए गए रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। इससे पहले दी गई 30 दिन की राहत 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी और माना जा रहा था कि अब अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा। हालांकि बदलते वैश्विक हालात ने इस फैसले को पलट दिया।
क्या वजह बनी नीति में बदलाव की?
ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। जैसे-जैसे इस मार्ग पर खतरा बढ़ा, तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। अमेरिका के सामने चुनौती यह थी कि सप्लाई और घटने पर कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ता। इसी स्थिति को संभालने के लिए ट्रंप प्रशासन ने बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से यह अस्थायी छूट दी।
रूस के राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव के अनुसार, पहले दी गई छूट से करीब 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आ सकता था, जो वैश्विक एक दिन की खपत के बराबर है। ऐसे में नई राहत से भी सप्लाई को समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया
अमेरिका के इस फैसले से उसके सहयोगी देशों में असंतोष बढ़ सकता है। यूरोप लंबे समय से रूस पर कड़े प्रतिबंध बनाए रखने की वकालत करता रहा है। यूरोपीय यूनियन की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी स्पष्ट कहा है कि रूस के प्रति नरमी दिखाने का यह सही समय नहीं है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम पश्चिमी देशों की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है और यूक्रेन युद्ध को लेकर बनाई गई रणनीति पर सवाल खड़े कर सकता है।
तेल बाजार में क्या दिखा असर?
इस घोषणा के बाद तेल बाजार में कुछ राहत के संकेत भी मिले हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 9 प्रतिशत गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जो पिछले एक महीने का निचला स्तर है। कीमतों में गिरावट की एक वजह यह भी रही कि ईरान की ओर से संकेत दिए गए हैं कि संघर्षविराम के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है।
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