
इंदौर। जिले के महू जनपद में एक अनूठी पहल स्वसहायता समूह की महिला किसानों को प्राकृतिक खेती, किचन गार्डन और आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ शुरू की गई है, जिसमें खेतों में कृषि पाठशाला लग रही है और कृषि सखी एवं संध्या सेल्फ हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष पवित्रा नीनामा ने बताया कि 5 गांवों में 100 से अधिक किसान परिवारों को किचन गार्डन के लिए प्रेरित किया गया है। दूसरी तरफ शासकीय उद्यान फलबाग द्वारा एबी रोड स्थित उद्यान के 111 पेड़ों की नीलामी की जा रही है।
वर्ष 2026-27 के लिए शासकीय उद्यान फलबाग ए.बी. रोड इंदौर स्थित उद्यान के आम, चीकू, फालसा एवं जामुन के कुल 111 पेड़ों के आंशिक/अद्र्ध फलन की नीलामी की जाएगी। यह नीलामी 16 अप्रैल को होगी। इसी तरह शासकीय उद्यान उण्डवा (मानपुर) में स्थित आम के कुल 66 पेड़ों के अद्र्धफलन/पूर्ण फलन की नीलामी 17 अप्रैल को संबंधित उद्यान में की जाएगी। इच्छुक व्यक्तियों कहा गया है कि वे निविदा प्रस्तुत करने से पूर्व फलबहार एवं शर्तों का अवलोकन कार्यालयीन समय में संबंधित उद्यान में उपस्थित होकर कर सकते हैं।दूसरी तरफ कृषि सखियों की पाठशाला में ना तो पारम्परिक शिक्षक हैं और ना ही छात्र, बल्कि किसान दीदीयां ही शिक्षक बनकर खेती के नए तरीके सीखा रही है। किसान अब अपने घरों में उगाई गई सब्जियों का उपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने किसानों को जीवामृत, बीजामृत और अन्य जैविक घोल तैयार करना भी सिखाया है, साथ ही 125 से अधिक खेतों की मिट्टी जांच (सॉइल टेस्टिंग) कराई है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस पहल का असर साफ नजर आने लगा है। कोलानी गांव की स्व- सहायता समूह सदस्य प्रमिला वसुनिया ने बताया कि किचन गार्डन से खेती में सुधार हुआ है और अब वे घर पर ही सब्जियां उगा रही हैं। यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। स्व- सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अब अनाज उपार्जन और विपणन कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। जिला प्रबंधक (मॉनिटरिंग-कृषि) गायत्री राठौड़ के अनुसार, जिले में 34 प्रोड्यूसर कंपनियों के माध्यम से महिलाएं गेहूं, मूंग और आलू जैसे उत्पादों के उपार्जन और विपणन से जुड़ी हैं। देपालपुर और महू ब्लॉकों में महिलाएं समूह के माध्यम से कृषि उत्पादों की खरीदी कर उन्हें मंडी तक पहुंचा रही हैं। डे-एसआरएलएम इंदौर के जिला परियोजना प्रबंधक श्री हिमांशु शुक्ला ने बताया कि कृषि पाठशाला का यह नवाचार सफल रहा है। अब तक 50 से अधिक गांवों में 100 से ज्यादा कृषि पाठशालाएं संचालित की जा चुकी हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कृषि सखियों द्वारा संचालित इन पाठशालाओं से किसानों को नि:शुल्क और व्यवहारिक जानकारी मिल रही है। इससे उन्हें खेती की सही तकनीक समझने का अवसर मिल रहा है।
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