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इन्दौर: अकेले राजबाड़ा में ही मिली 2 लाख से ज्यादा हस्तलिखित पांडुलिपियां

May 05, 2026

विभाग ने रजिस्टर्ड कराई… विशेषज्ञ करेंगे जांच… संरक्षित भी की जाएंगी

इन्दौर। भारत सरकार (Government of India) के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ (‘Gyan Bharatam Mission’) के तहत खोजी जा रही भी प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों (Rare manuscripts) के पहले चरण में इंदौर (Indore) में पुरातत्व विभाग को अपने ही पास लाखों पांडुलिपियां मिल गई हैं। अकेले राजबाड़ा (Rajwada) के खाते में ही 2 लाख से ज्यादा पांडुलिपियां हैं, जिन्हें रजिस्टर्ड कर दिया गया है।



  • विभाग ने इंदौर सहित इस रीजन के 15 जिलों हस्तलिखित पांडुलिपियों की खोज शुरू की है। पहला चरण इन्हें खोजकर रजिस्टर्ड करना है। हर जिले में एक समिति का गठन किया गया है, जो इसके लिए काम कर रही है। इंदौर पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इंदौर में काम तेजी से शुरू किया गया है। राजबाड़ा में मौजूद 2 लाख से ज्यादा हस्तलिखित पांडुलिपियां रजिस्टर्ड की जा चुकी है। इसके अलावा विभाग के पास ही मौजूद लालबाग के रिकॉर्ड में 20 पांडुलिपियां और केंद्रीय संग्रहालय (सेंट्रल म्यूजियम) के रिकॉर्ड में मौजूद 11 पांडुलिपियां रजिस्टर्ड की जा चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि ये पहला चरण है, जिसके तहत हमें अभी इन्हें रजिस्टर्ड करना है। तीसरे चरण में विशेषज्ञ टीम आकर इनका परीक्षण करेगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया होगी। इसमें इन पांडुलिपियों का वर्गीकरण शामिल है।

    धार्मिक से लेकर प्रशासनिक रिकॉर्ड तक
    अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, राजबाड़ा में मिली पांडुलिपियों के बारे में अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। होलकर कालीन पत्र से लेकर उस समय के प्रशासनिक रिकॉर्ड संभवत: इसमें हो सकते हैं। हो सकता है इसमें स्टेट की जमीनों की जानकारियों भी हो, लेकिन सटिक जानकारी विशेषज्ञों के देखने के बाद ही पता चलेगी। लालबाग और सेंट्रल म्यूजियम की पांडुलिपियां धार्मिक है और ये रामायण एवं महाभारत से संबंधित है।

    भारत सरकार का अभियान
    ये अभियान भारत सरकार का है, जिसके लिए मध्यप्रदेश में पुरातत्व विभाग नोडल एजेंसी है। देशभर में ये अभियान 15 जून तक चलाया जाएगा। इसमें पांडुलिपियों को खोजकर उनका संरक्षण कर उनका डिजिटाइजेशन किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय समाज के समृद्ध इतिहास से रूबरू होने का मौका मिले। मध्यप्रदेश में भी जैन मंदिरों, ट्रस्ट और संस्थाओं में पांडुलिपियों विशाल भंडार है। ऐप ज्ञान भारतम् को डाउनलोड करके खुद भी पांडुलिपि रजिस्टर्ड कर सकते हैं। 75 साल से पुराने हस्तलिखित ग्रंथ को पांडुलिपि माना जा रहा है।

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