
जमीनी जादूगरों की गिरफ्त में प्रशासन, रोजाना नित नए घोटाले हो रहे हैं उजागर, पहले जिस तहसीलदार ने नामांतरण रोका बाद में उसी ने कर दिया खेल
यह पहला मौका है जब कलेक्टर से लेकर संभागायुक्त कार्यालय जमीनी जादूगरों का मददगार नजर आ रहा है
शासन की रोक के बावजूद धारा १६ के तहत भी जारी कर दी विकास अनुज्ञाएं
कोर्ट आदेश, विधिक राय सहित नियमों की मनमानी व्याख्याएं भी
गृह निर्माण संस्थाओं और सीलिंग की जमीनों पर भी रोक के बावजूद हो रही हैं मंजूरियां
राजस्व के मामले में इंदौर में पहली बार इतनी दयनीय स्थिति
इंदौर। बीते कई वर्षों में यह पहला मौका है, जब प्रशासन (Administration) के राजस्व विभाग (Department of Revenue) में इस तरह की गड़बडिय़ां सामने आ रही हैं। जमीनी जादूगरों (Magicians of the Ground) को लाभ पहुंचाने के लिए कोर्ट आदेश, विधिक राय के साथ नियमों की मनमानी व्याख्याएं कर अनुमतियां दी जा रही है, तो दूसरी तरफ 15 महीने बाद पोलपट्टी खुलने पर विकास अनुमति निरस्त भी करना पड़ रही है। धारा 16 के खेल को पिछले दिनों अग्रिबाण ने उजागर किया था, उसके बाद अन्य कॉलोनाइजर भी अदालती आदेश लेकर आ गए हैं और अब प्रशासन के लिए यह मामला गले की हड्डी बन गया, तो दूसरी तरफ 12 एकड़ पर फर्जी शपथ-पत्र के आधार पर मंजूर करवाई कॉलोनी की अनुमति निरस्त भी करना पड़ी।
बीते वर्षों में शासन के निर्देश पर जहां सख्ती से ऑपरेशन भूमाफिया चला, जिसमें पुलिस, प्रशासन, सहकारिता और निगम के माध्यम से बड़े जमीनी घोटाले पकड़े और दर्जनों एफआईआर दर्ज कराई गई। अब उनमें से ही कई मामलों में गली ढूंढकर अभिन्यास मंजूरी और विकास अनुज्ञाएं हासिल करने का खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा है, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश, उसके आधार पर विधिक राय लेने के साथ नियमों की मनमानी व्याख्या कर जमीनी जादूगरों को उपकृत किया जा रहा है। पिछले दिनों हातोद के सोनगीर में 200 करोड़ रुपए की जमीन पर विकसित की जा रही है स्वस्तिक ग्रैंड कॉलोनी का घोटाला सामने आया, जिसमें 15 महीने बाद दी गई अनुमति को अपर कलेक्टर द्वारा निरस्त किया गया। हालांकि इसमें तत्कालीन संभागायुक्त ने स्टे भी दे डाला, तो दूसरी तरफ अभिभाषक अभिषेक रघुवंशी ने बताया कि बिचौली हप्सी के बढ़ियाकीमा में सर्वे नम्बर 150/2, 151, 152, 153/1, 153/2, 154 सहित अन्य सर्वे नम्बरों की लगभग 12 एकड़ जमीन पर सतवा सेक्टर-बी कॉलोनी के नाम से विकास अनुमति 05.08.2024 को कलेक्ट्रेट के कॉलोनी सेल द्वारा जारी की गई थी। जबकि इसी जमीन को लेकर 24वें व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड में सिविल प्रकरण विचाराधीन था और सिविल वाद के तथ्यों को छुपाने के साथ-साथ फर्जी शपथ-पत्र पेश कर विकास अनुमति प्राप्त कर ली गई। मेसर्स सुपरलेटिव देवकॉन एलएलपी तर्फे पार्टनर जसप्रीतसिंह भाटिया के नाम पर यह अनुमति दी गई थी, जिसे पिछले दिनों चर्चित अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने स्थगित कर दी। इसी तरह का दूसरा एक चौंकाने वाला मामला भी बिचौली हप्सी से ही जुड़ा है, जिसमें मां राजेश्वरी गृह निर्माण संस्था की सीलिंग प्रभावित जमीन पर तत्कालीन तहसीलदार बलवीरसिंह राजपूत ने नामांतरण आदेश जारी कर दिया। आवेदिका आशा जैन, अनिता जैन की सर्वे नम्बर 34/3/2 पर स्थित जमीन का नामांतरण पिछले 20 सालों से लम्बित था और कोई भी तहसीलदार नहीं कर सका। यहां तक कि जिस तहसीलदार राजपूत ने उक्त नामांतरण किया, उन्होंने भी इसी प्रकरण में सालभर पहले नामांतरण करने से इनकार करते हुए आदेश भी जारी किया था। कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि वे इस मामले की जांच कराकर उपयुक्त और आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
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