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नवीन बायपास, इकोनॉमी, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, रेलवे लाइन सहित अधर में लटके इंदौरी प्रोजेक्टों को अब मिल सकेगी रफ्तार

April 23, 2026

  • मामला भूमि अधिग्रहण में किसानों को चार गुना मुआवजा राशि देने के मुख्यमंत्री के फैसले का, कलेक्टर बोले: इंदौर-उज्जैन फोरलेन के लिए ज्यादा राशि देने से ही विरोध नहीं हुआ
  • – इंदौर-पीथमपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में ३ हजार एकड़ जमीन होगी अधिग्रहित
  • – पूर्वी और पश्चिमी रिंग रोड के लिए नेशनल हाईवे को भी आ रही है परेशानी
  • – पालाखेड़ी, खजराना जागीर में हाउसिंग बोर्ड की योजनाएं उलझी पड़ीं
  • – प्राधिकरण की खंडवा रोड सहित अहिल्या पथ पर भी आए संकट
  • – प्रोजेक्ट कॉस्ट बढऩे से होने वाला विभागीय घाटा भी होगा खत्म
  • – कलेक्टर गाइडलाइन और मार्केट रेट का अंतर अब घट सकेगा

इंदौर, राजेश ज्वेल। कैबिनेट बैठक में कल एक महत्वपूर्ण निर्णय भूमि अधिग्रहण के मामले में हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को चार गुना तक उनकी जमीनों का मुआवजा देना तय किया और शाम को पत्रकार वार्ता में भी इसकी जानकारी दी। इस फैसले से प्रदेशभर में चल रहे प्रोजेक्टों को तो गति मिलेगी ही, वहीं इंदौर को भी लाभ पहुंचेगा। नवीन बायपास, इंडस्ट्रियल और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, रेलवे लाइन से लेकर अधर में लटके तमाम प्रोजेक्टों की रफ्तार बढ़ेगी और किसानों का विरोध भी कम होगा। कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि इंदौर-उज्जैन फोरलेन के लिए भी मुआवजे की राशि किसानों को बढ़ाकर दी गई और उसी के परिणामस्वरूप जो किसान पहले आंदोलन कर रहे थे, बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और आभार भी माना, जिसके चलते मुआवजा राशि बंटने के साथ मौके पर काम भी शुरू हो गया है।

किसान संगठनों द्वारा उज्जैन सिंहस्थ से लेकर रेलवे लाइनों, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, नेशनल हाईवे की सडक़ों के साथ-साथ सभी प्रोजेक्टों के लिए जो हजारों एकड़ जमीनें अधिग्रहित की जा रही है, उनका विरोध किया जा रहा है। उज्जैन में तो प्राधिकरण ने सिंहस्थ के मद्देनजर 6 हजार एकड़ से अधिक जमीनों पर टीपीएस योजनाएं लागू की थी, मगर किसानों के विरोध के चलते मुख्यमंत्री को ये योजनाएं निरस्त करवाना पड़ी। इतना ही नहीं, जो इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर सिंहस्थ के मद्देनजर बनवाया जा रहा है, उसका भी किसानों ने विरोध किया और उज्जैन के अलावा इंदौर में भी कलेक्टर कार्यालय तक ट्रैक्टर रैली निकालने के साथ किसान नेताओं ने दिल्ली तक जाकर चर्चा की। मगर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बिक्री छांट के आधार पर ना सिर्फ मुआवजे की राशि बढ़वाई, बल्कि उसी मुताबिक अवॉर्ड भी पारित करवाया, जिसके चलते विरोध कर रहे किसानों ने मुख्यमंत्री के साथ कलेक्टर काभी स्वागत किया, लेकिन दूसरी तरफ किसानों द्वारा लगातार प्राधिकरण की पुरानी योजनाओं से लेकर हाउसिंग बोर्ड की पालाखेड़ी, छोटी खजरानी की योजनाओं में भू-अर्जन का विरोध किया जाता रहा, जिसके कारण खंडवा रोड पर प्राधिकरण की जो नई टीपीएस योजनाएं लाई जाना थी, उन्हें भी प्रशासन को टलवाना पड़ा और अहिल्या पथ योजना का भी विरोध किया गया।


  • इतना ही नहीं, नेशनल हाईवे द्वारा नवीन बायपास, जिसमें पश्चिमी और पूर्वी रिंग रोड का निर्माण होना है, उसके लिए भी जो 2 हजार एकड़ से अधिक जमीनें अधिग्रहित की जाना है, उसमें भी किसानों का विरोध नजर आया। नवीन बायपास में 140 किलोमीटर लम्बा, पश्चिमी और पूर्वी रिंग रोड निर्मित होना है, जिसमें इंदौर, धार, देवास के 64 गांवों की लगभग 2800 एकड़ जमीन अधिग्रहित होना है। पश्चिमी बायपास, पीथमपुर से बेटमा-हातोद होते हुए क्षिप्रा तक 64 किलोमीटर लम्बा निर्मित होना है, तो पूर्वी बायपास क्षिप्रा से डबल चौकी, सिमरौल होते हुए खंडवा रोड के पास भरदला तक 77 किलोमीटर लम्बा निर्मित होगा। इसी तरह इंदौर-बुधनी रेल लाइन के लिए भी किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसान लगातार लामबंद हैं और उन्होंने भी वर्तमान बाजार दर के हिसाब से चार गुना मुआवजा राशि की मांग की, जो अब पूरी हो जाएगी। इसी तरह एमपीआईडीसी द्वारा इंदौर-पीथमपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर निर्मित कराया जा रहा है। 17 कि.मी. लम्बे इस कॉरिडोर के लिए भी लगातार किसानों से चर्चा की जा रही है और अब इस निर्णय से इसको भी रफ्तार मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, किसानों के विरोध, कोर्ट-कचहरी और अन्य कारणों से प्रोजेक्ट लेट-लतीफी का शिकार होते हैं, जिससे उनकी कॉस्ट यानी कीमत भी बढ़ जाती है। लिहाजा हमने तय किया है कि अन्नदाताओं को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, जिससे सरकारी गाइडलाइन और बाजार दर का मूल्य बराबर हो सके।

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