
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने दावा किया है कि दोनों पक्षों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है। हालांकि ईरान ने साफ किया है कि फिलहाल परमाणु कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं हुई है। होर्मुज (Hormuz) पर भी ईरान के ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज पर ईरान का ही नेतृत्व रहेगा।
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान संवर्धित यूरेनियम छोड़ने पर सहमत हो गया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने किसी भी शुरुआती समझौते के लिए ईरान से यूरेनियम कार्यक्रम पर प्रतिबद्धता की मांग की थी। हालांकि समझौते के सटीक विवरण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का बड़ा हिस्सा तय हो चुका है और जल्द इसकी घोषणा की जा सकती है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता कितनी अहम?
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगहदम ने कहा कि वार्ता सम्मानजनक आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता की तारीफ की। रिपोर्टों के अनुसार इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
क्या तेल बाजार पर असर पड़ सकता है?
अगर होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से तेल सप्लाई करता है। किसी भी समझौते से तेल कीमतों में राहत मिल सकती है और वैश्विक बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान 60 दिन तक युद्धविराम बढ़ाने के करीब पहुंच गए हैं। इस दौरान दोनों पक्ष स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। समझौते में प्रतिबंधों में राहत, संपत्तियों को जारी करना और तेल व्यापार बहाल करना भी शामिल हो सकता है।
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