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ईरान : IRGC ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को किया किनारे, मोजतबा खामनेई के इर्द-गिर्द कड़ा सुरक्षा घेरा

April 22, 2026

तेहरान. ईरान (Iran) में सरकार (Government) और शक्तिशाली सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच लगातार गतिरोध बढ़ता जा रहा है. अब जानकारी आ रही है कि IRGC ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (President Masoud Pezeshkian) की प्रमुख नियुक्तियों को रोक दिया है और सर्वोच्च नेता मोहतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की सुरक्षा को और कड़ा कर दिया है, जिससे जिससे निर्वाचित सरकार की उन तक पहुंच बंद हो गई है.

फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार 22 अप्रैल 2026 को देश की राजनीतिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. रिपोर्ट के अनुसार, ‘ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की नियुक्तियों को रोका है और सर्वोच्च नेता मोहतबा खामेनेई के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया है.’


  • रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने नया खुफिया मंत्री नियुक्त करने की कोशिश की, लेकिन IRGC कमांडर अहमद वाहिदी के दबाव में सभी उम्मीदवार खारिज कर दिए गए. वाहिदी का तर्क है कि युद्ध के वक्त में सभी महत्वपूर्ण, संवेदनशील पदों का चयन और प्रबंधन सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा किया जाना चाहिए. इस सैन्य हस्तक्षेप ने नागरिक सरकार की शक्तियों को सीमित कर दिया है.

    सर्वोच्च नेता तक सीमित पहुंच
    रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि हालात और भी गंभीर हो गए हैं, क्योंकि आईआरजीसी अब सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई तक होने वाले संवाद को भी नियंत्रित कर रही है. वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की एक परिषद अब नेतृत्व तक पहुंचने वाली जानकारियों को फिल्टर करती है. इसके कारण राष्ट्रपति पेजेशकियन की रिपोर्ट खामेनेई तक नहीं पहुंच पा रही है और वह प्रशासन से पूरी तरह अलग-थलग हो गए हैं. पेजेशकियन ने कई बार तत्काल बैठकों की कोशिश की है, लेकिन वो बातचीत करने में विफल रहे.

    पुराना है ये ट्रेंड?
    उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तख्तापलट न समझा जाए. ये ईरान की सत्ता संरचना में धीरे-धीरे हो रहा बदलाव है. विश्लेषकों का कहना है कि ये हमेशा से तय था कि आईआरजीसी अपनी भूमिका को और बढ़ाएगी. जैसे-जैसे शासन ने अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया है, नागरिक संस्थानों की अहमियत कम होती गई है. हालांकि, ये बदलाव ईरान की विदेश नीति को और सख्त बना सकता है, जिससे वाशिंगटन के साथ समझौतों की गुंजाइश कम हो जाएगी.

    उत्तराधिकार को लेकर भी खींचतान
    ईरान के नेतृत्व के अंदर उत्तराधिकार को लेकर भी खींचतान चल रही है. वरिष्ठ अधिकारी अली असगर हेजाजी ने मुजतबा खामेनेई के उत्तराधिकारी बनने का विरोध किया था. उन्होंने चेतावनी दी थी कि ऐसा होने पर नियंत्रण पूरी तरह रिवोल्यूशनरी गार्ड के हाथों में चला जाएगा और नागरिक संस्थान किनारे कर दिए जाएंगे. वर्तमान स्थितियां बताती हैं कि ये आशंका सच साबित हो रही है. सुधारों का वादा कर सत्ता में आए पेजेशकियन के लिए अब ये सबसे बड़ी चुनौती है.

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