गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 31 साल पुराने अपहरण और हत्या केस (Salim Ahmed) का आरोपी सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद (Salim Ahmed) आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। चौंकाने वाली बात यह है कि वह खुद को मृत दिखाकर करीब 26 साल तक अलग-अलग पहचान के सहारे पुलिस को चकमा देता रहा।
यह मामला 1995 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल का अपहरण हुआ था। आरोपियों ने 30,000 रुपये की फिरौती मांगी, लेकिन रकम मिलने से पहले ही बच्चे की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। उस समय यह घटना पूरे इलाके में दहशत का कारण बनी थी।
जांच में सामने आया कि सलीम वास्तिक जमानत पर छूटने के बाद फरार हो गया था। इसके बाद उसने करीब ढाई दशक तक अपनी पहचान छिपाकर जीवन बिताया। वह करनाल और अंबाला में मजदूरी करता रहा, फिर 2010 के आसपास गाजियाबाद के लोनी में बस गया।
यहां उसने नई पहचान के साथ महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और धीरे-धीरे खुद को सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर के रूप में भी पेश करने लगा।
मामले का खुलासा इस साल फरवरी में हुआ, जब एक हमले में घायल होने के बाद आरोपी अस्पताल पहुंचा। जांच के दौरान उसके फिंगरप्रिंट पुराने पुलिस रिकॉर्ड से मैच हो गए। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर क्राइम ब्रांच ने उसकी असली पहचान उजागर की और उसे लोनी से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने शामली में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ली थी और नानचाकू चलाने में माहिर था। उसके पुराने संपर्कों और नेटवर्क की भी गहराई से जांच की जा रही है।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिवार का दर्द फिर सामने आया। संदीप की मां ने कहा कि उनका बेटा स्कूल गया था, लेकिन कभी लौटकर नहीं आया। तीन दशक बीत जाने के बाद भी उनका दुख कम नहीं हुआ है। उन्होंने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।
यह मामला न सिर्फ अपराध की गंभीरता को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि तकनीक और जांच की लगातार कोशिशों से सालों पुराने केस भी आखिरकार खुल सकते हैं।
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