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नदी जोड़ो अभियान: केन बेतवा परियोजना

डॉ. दिनेश प्रसाद मिश्र 
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्षो पूर्व देश की जल एवं बाढ़ समस्या के निदान के लिए नदियों को परस्पर जोड़ने तथा केन बेतवा नदी को जोड़कर बुंदेलखंड की प्यासी धरती एवं वहां के लोगों की प्यास बुझाने हेतु इस परियोजना का जो सपना देखा था उसे साकार करने हेतु विश्व जल दिवस 23 मार्च को प्रधानमंत्री की उपस्थिति में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना को साकार करने का श्रीगणेश किया। समझौते के समय उपस्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए परियोजना के महत्व का प्रतिपादन करते हुए कहा कि यह परियोजना बुंदेलखंड का भाग्य बदलेगी, इससे प्यास भी बुझेगी और विकास भी होगा। दोनों मुख्यमंत्रियों ने सिर्फ कागज पर हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं बल्कि बुंदेलखंड की भाग्य रेखा को नया रंग रूप दिया है। परियोजना से लाखों लोगों को पानी तो मिलेगा ही, बिजली भी मिलेगी प्यास भी बुझेगी और प्रगति भी होगी।
इस परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश की बेतवा और केन नदी को आपस में जोड़ा जाना है। केन नदी जबलपुर के पास कैमूर की पहाड़ियों से निकलकर 427 किलोमीटर उत्तर की ओर चलकर उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के चिल्ला गांव में यमुना नदी में मिलती है। इसी प्रकार बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलकर 576 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में यमुना में मिलती है। 6000 करोड़ की इस परियोजना का मुख्य बांध पन्ना टाइगर रिजर्व के दौधन गांव में बनना है , 77 मीटर ऊंचा तथा 19633 वर्ग किलोमीटर जलग्रहण क्षमता वाले इस मुख्य बांध में 2853 एम सी एम पानी भंडारण की क्षमता होगी।
2613.19 करोड़ की लागत से बनने वाले इस बांध में दो बिजलीघर बनेंगे, जिससे 78 मेगा वाट बिजली मध्य प्रदेश को प्राप्त होगी । 341.55 करोड की लागत से इन बिजली घरों का निर्माण होगा। बांध से 2708. 36 करोड़ की लागत से नहरे बनाई जाएंगी । 218 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर उत्तर प्रदेश के बरुआसागर में जाकर मिलेगी ।इस नहर से 10 74 एम सी एम पानी प्रतिवर्ष भेजा जाएगा, जिसमें से 659 एम सी एम पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा। दौधन बांध के अतिरिक्त तीन अन्य बांध भी मध्य प्रदेश में  में बेतवा नदी पर बनाए जाएंगे। रायसेन तथा विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बांध से 56850 एकड़ क्षेत्र में ,बरारी बैराज से 2500 तथा केसरी बैराज से 2880 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। लिंक नहर से मार्गो में 60294 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा ,इससे मध्य प्रदेश के 46599 व उत्तर प्रदेश के 13695 हे . क्षेत्र में सिंचाई होगी । दौधन बांध से छतरपुर और पन्ना जिले की 3.23 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इस परियोजना को मूर्त रूप देने में म कुल 35111 करोड़ रुपए व्यय होंगे, जिसमें से 90% धनराशि केंद्र सरकार वहन करेगी, शेष धनराशि की 5- 5% राशि राज्य सरकारें वहन करेंगी।
आज सूखे के प्रकोप से पीड़ित तथा बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की भूमि को केन बेतवा लिंक परियोजना की लंबे समय से प्रतीक्षा थी, जो अब मूर्त रूप लेने जा रही है लेने जा रही है। बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के 9 जिले आते हैं, जिन्हें इस परियोजना के मूर्त रूप लेने की लंबे समय से प्रतीक्षा थी, जो अब मूर्त रूप लेने जा रही है। योजना के मूर्त रूप लेने से हमीरपुर स्थित मौदहा बांध को लिंक नहर से जोड़कर भरा जाएगा। इससे दोनों राज्यों को लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश के महोबा झांसी ललितपुर एवं हमीरपुर के 21लाख लोगों को 67 मिलीयन क्यूबिक मीटर जल मिलेगा। इसके साथ ही बांदा झांसी महोबा ललितपुर एवं हमीरपुर के 2.51 लाख हेक्टेयर  क्षेत्र में फसलों की सिंचाई की जा सकेगी। हमीरपुर में मौदहा बांध को भरकर हमीरपुर में 26900 हेक्टेयर की सिंचाई व्यवस्था और तहसील राठ में पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। जनपद महोबा में  लगभग 37564 हेक्टेयर ललितपुर में 3533 हेक्टेयर झांसी में लगभग 17488 हेक्टेयर और बांदा में लगभग 192479 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का लाभ प्राप्त होगा। जनपद झांसी में लगभग 14.66 मिलियन क्यूबिक मीटर ललितपुर में 31.8 क्यूबिक मीटर, हमीरपुर में 2.79 मिलियन क्यूबिक मीटर और महोबा में लगभग 20.13 मिलियन क्यूबिक मीटर जल पेयजल के रूप में उपलब्ध कराया जा सकेगा। परियोजना के अंतर्गत बरियारपुर पिकअप  बीयर के डाउनस्ट्रीम में दो नए वैराजों का निर्माण कर लगभग 188 क्यूबिक मीटर जल भंडारण किया जा सकेगा।
केन बेतवा लिंक नहर पर उत्तर प्रदेश की आवश्यकता के अनुसार आउटलेट प्रदान करते हुए महोबा हमीरपुर  झांसी जिलों में अनेक वर्षों से पानी उपलब्ध न होने के कारण सूखे पड़े अनेक बांधों को बरसात में जल उपलब्ध कराकर भरा जाएगा। मध्यप्रदेश में छतरपुर टीकमगढ़ पन्ना जिले में किसान धान गेहूं की खेती कर सकेंगे, जो अबतक सिंचाई के साधनों के अभाव में नहीं कर पाते थे, वर्षा जल के सहारे बोई गई फसल प्रायः सूख जाती थी। अब पर्याप्त मात्रा में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध हो जाने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के न केवल  किसान खुशहाल होंगे अपितु वहां के खेतों में फसलें लहलहाएंगी। दोनों राज्यों में 12 लाख हेक्टेयर  भूमि में वर्ष में 2-3 फसलें उगाई जा सकेंगी, पीने का पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा जिससे क्षेत्र का चतुर्दिक विकास होगा। इस परियोजना से  प्रत्यक्ष रूप से मध्य प्रदेश के  पन्ना टीकमगढ़ छतरपुर सागर दमोह दतिया विदिशा शिवपुरी और रायसेन जिले तथा उत्तर प्रदेश  के बांदा महोबा झांसी और ललितपुर जिलो को इसका लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त अप्रत्यक्ष रूप से अन्य कई जिले इस परियोजना से लाभान्वित होंगे।
यह परियोजना वर्ष 2005 में ही स्वीकृत की गई थी, जब उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए 547 मिलीयन क्यूबिक मीटर एमसीएम और खरीफ फसल के लिए 1153 एमसीएम पानी देना तय हुआ था किंतु दोनों राज्यों के मध्य उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए यह पानी  देने को लेकर विवाद था। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश ने रबी फसल के लिए 700 एमसीएम पानी की मांग रखी जो बाद में 788 एमसीएम तक पहुंच गई। तुरंत बाद यह मांग जुलाई 2019 में  930 एमसीएम पानी  उपलब्ध कराने तक पहुंच गई और उसकी उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु उत्तर प्रदेश द्वारा इस आशय काका मांग पत्र भेज दिया गया। मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश को इतना पानी देने के लिए तैयार नहीं था जिससे दोनों राज्यों के मध्य पानी बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था और योजना को मूर्त रूप देना सम्भव नहीं हो सका था।
वस्तुतः केन बेतवा लिंक परियोजना माननीय अटल बिहारी वाजपेयी की राष्ट्र को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना की भांति समूचे राष्ट्र को जल तथा बाढ़ की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए देश की 37 प्रमुख नदियों को एक-दूसरे से जोड़ने की महत्वपूर्ण परियोजना थी जिनमें से मध्य प्रदेश के अंतर्गत नर्मदा तथा क्षिप्रा को जोड़ने की योजना मध्य प्रदेश राज्य से ही संबंधित होने के कारण समय से मूर्त रूप ले चुकी है। जिसके परिणाम स्वरूप गर्मी में सूख जाने वाली क्षिप्रा में अब गर्मी में भी पर्याप्त पानी बना रहता है तथा उज्जैन को अपेक्षा अनुसार जल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होती रहती है। इन्हीं योजनाओं में केन बेतवा  परियोजना भी थी जो समय के भंवर में फंसकर अनेक कारणों से अबतक मूर्त रूप नहीं ले सकी थी किंतु अब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं प्रधानमंत्री की सदिच्छा से यह योजना मूर्त रूप लेने जा रही है। इससे दोनों राज्यों का चतुर्दिक विकास होने के साथ-साथ राष्ट्र की विकास की गति में भी इनका योगदान बढ़ेगा तथा बुंदेलखंड की प्यासी धरती सदियों से चली आ रही अपनी प्यास को बुझाकर राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देगी।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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