
इन्दौर। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सडक़ दुर्घटना में घायल मरीजों को तत्काल और निशुल्क उपचार नहीं देने वाले अस्पतालों पर अब जिला प्रशासन सख्त हो गया है। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि योजना का लाभ देने से इनकार करने वाले अस्पतालों का पंजीयन निरस्त किया जाएगा। अधिकारियों ने ऐसे अस्पतालों की सूची बनाने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 फरवरी से शुरू की गई पीएम राहत योजना के तहत सडक़ दुर्घटना पीडि़तों को गोल्डन ऑवर के दौरान दुर्घटना की तारीख से सात दिनों के भीतर डेढ़ लाख रुपए तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाना है, लेकिन इंदौर के कई अस्पताल बेतुके कारण बताकर मरीजों को दूसरे अस्पताल रेफर कर रहे हैं। ज्ञात हो कि इंदौर जिले में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को इस योजना में नामित किया गया है, साथ ही अन्य निजी अस्पतालों को भी इसमें शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
्रट्रेनिंग और जानकारी देने के बावजूद भी लापरवाही
प्रशासन ने बताया कि लगातार मॉनिटरिंग में सामने आया है कि कई शासकीय और निजी अस्पताल दुर्घटना पीडि़तों को योजना का लाभ नहीं दे रहे हैं। पुलिस द्वारा डीएआर के माध्यम से लाए गए घायलों का पंजीयन और उपचार करने से भी मना किया जा रहा है। कुछ अस्पताल यह कहकर मरीजों को लौटा रहे हैं कि वहां योजना लागू नहीं है या उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, जबकि जिला प्रशासन योजना की प्रक्रिया को लेकर कई बैठकों में अस्पताल प्रबंधन को जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद लापरवाही सामने आने पर अब कार्रवाई की तैयारी की गई है।
हर हालत में इलाज करना होगा
अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हों या नहीं, सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम को सडक़ दुर्घटना में घायल मरीजों का प्राथमिक उपचार और स्टेबलाइजेशन करना अनिवार्य है। जीवनरक्षक उपचार के बाद ही मरीज को अन्य अस्पताल रेफर किया जा सकेगा। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि यदि किसी अस्पताल ने योजना का लाभ दिए बिना मरीज का उपचार या पंजीयन नहीं किया तो बिना किसी कारण बताओ नोटिस के पंजीयन निरस्त किया जाएगा। एमवाय अस्पताल को चिकित्सकों का योजना संबंधी उन्मुखीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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