
इंदौर। नगरीय प्रशासन (Urban Administration) और विकास विभाग द्वारा जहां अर्बन कॉनक्लेव (Urban Conclave) का आयोजन इसी माह के अंत में किया जाएगा तो दूसरी तरफ महोत्सव भी आयोजित होगा। वहीं इसी तर्ज पर अगले माह ग्वालियर में अमरूद महोत्सव (Guava Festival) भी प्रस्तावित किया गया है। उद्यानिकी संचालनालय ने प्याज, लहसुन और सब्जी क्लस्टर बनाने की योजना पर भी काम शुरू किया। इंदौर जैसे बड़े शहरों के आसपास ये क्लस्टर बनाए जाएंगे। इसी तरह नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव और राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन भी प्रस्तावित किया गया है।
उद्यानिकी संचालनालय प्याज, लहसुन, सब्जी के अलावा मसालों और फल-फूलों के उत्पादन को भी बढ़ावा देने के लिए जिलों में अलग-अलग फसलों के क्लस्टर विकसित करेगा। वहीं बड़े धार्मिक स्थलों के आसपास फूलों के क्लस्टर विकसित करने की भी योजना है, ताकि इनसे जुड़े किसानों को उचित मार्केट के साथ-साथ स्थानीय मांग की पूर्ति करने में आसानी रहे। सिंहस्थ जैसे आयोजन में भी चूंकि फल-फूल बड़ी तादाद में इस्तेमाल होंगे, लिहाजा उसके आसपास भी इस तरह की फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और अल्प अवधि की फसलों के लिए जागरूक किया जाए। फसल चक्र में परिवर्तन और प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए वातावरण बनाना आवश्यक है। ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और किसानों के लिए ई-पासबुक सुविधा भी शुरू की गई है। बलराम कृषि महोत्सव के साथ-साथ संभागीय मुख्यालयों पर फूड फेस्टिवल भी होंगे। खरगोन में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन और कपास एवं मिर्च महोत्सव के आयोजन की योजना है। अंतरदेशीय मत्स्यपालन और जलीय कृषि पर जबलपुर में कार्यक्रम होगा। इसी प्रकार जबलपुर में ही कुक्कुटपालकों और उद्यमियों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। बुरहानपुर में केला महोत्सव, उज्जैन में हाईटेक नर्सरी और संरक्षित खेती पर कार्यशाला, सागर और रतलाम में कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का राज्य स्तरीय सम्मेलन, नीमच में उद्यानिकी में आधुनिक तकनीक पर कार्यशाला, इंदौर में सब्जी महोत्सव तथा एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम और भोपाल में पराली प्रबंधन पर कार्यशाला के साथ ही नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन भी प्रस्तावित है।
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