मध्‍यप्रदेश

दुकानदार क्यों नहीं देते पक्का बिल? अब ग्राहक बनकर दुकानों पर जाएंगे अधिकारी, अगर लापरवाही मिली तो…

छतरपुर: अधिकतर राज्यों में देखा जाता है कि व्यापारी ग्राहकों को खरीदे गए सामान का पक्का बिल नहीं देते हैं. वे ग्राहकों से कोई बहाना बनाकर या फिर पक्का बिल लेने पर सामान महंगा मिलने की बात कहकर टाल देते हैं. ग्राहक भी सामान की कीमत बढ़ जाने को लेकर पक्का बिल नहीं मांगता और इस तरह व्यापारी सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाता है. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में भी ऐसा होता आ रहा है लेकिन अब वाणिज्य कर अधिकारियों ने ऐसे व्यापारियों का पता लगाने की नई तरकीब निकाली है. वे ग्राहक बनकर दुकानों पर जाएंगे और पता लगाएंगे कि दुकानदार ग्राहकों को पक्का बिल दे रहे हैं या नहीं. बिल न देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.


वाणिज्य कर अधिकारी आरके तिवारी ने कहा कि व्यापारियों द्वारा ग्राहकों को पक्का बिल न दिए जाने संबंधी शिकायतें मिली हैं. जल्द ही पूरे क्षेत्र का जायजा लिया जाएगा. जो व्यापारी पक्का बिल नहीं दे रहे हैं, उनपर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) के नियमों के अनुसार अगर कोई दुकानदार ग्राहक को बिल नहीं देता है और समय पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करता है या सामान की बिक्री को छुपाकर टैक्स चोरी करता है, तो ऐसे मामलों में जीएसटी ऑफिसर ग्राहक बनकर भी व्यापारी के प्रतिष्ठान पर पहुंच दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं. संबंधित व्यापारी के दस्तावेजों में जीएसटी R-9, 9A और 9C में अगर गड़बड़ी पाई गई तो नोटिस दिया जाएगा और फिर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

गौरतलब है कि 200 रुपये से ज्यादा का सामान बेचने पर दुकानदार को पक्का बिल देना अनिवार्य किया गया है. किराना स्टोर, बर्तन, कपड़े, ज्वैलरी, हार्डवेयर सामान, खाद-बीज, दवाई, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि की दुकानों पर ग्राहक बिल मांगे या नहीं लेकिन दुकानदार को बिल देना अनिवार्य है. ज्यादातर मामलों में ग्राहकों को जानकारी के अभाव में कच्चा बिल थमा दिया जाता है, जोकि नियमों का सरासर उल्लंघन है. ग्राहक को पक्का बिल देने पर सामान महंगा होने का डर दिखाया जाता है. वहीं दुकानदार के बिल न देने की एक वजह यह भी है कि अगर सामान की गुणवत्ता में कोई शिकायत पाई जाती है, तो बिल के अभाव में ग्राहक कंज्यूमर फोरम या संबंधित कंपनी के पास शिकायत नहीं कर सकता है.

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