इंदौर

इंदौर में 49 हजार कैदी फिलहाल जेलों में बंद, पैर रखने तक की जगह नहीं…

 

  •  कोरोना काल में प्रदेशभर की जेलें कैदियों से ठसाठस हुईं
  •  जेल प्रशासन संक्रमण को देखते हुए चिंतित
  •  एक बार फिर आपातकालीन पैरोल लागू कर कैदियों को छोडऩे पर विचार

इन्दौर। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकरणों ने जेल प्रशासन के लिए एक नई चिंता खड़ी कर दी है। प्रदेशभर की सेंट्रल, जिला और उपजेल कैदियों से ठसाठस हो गई हैं। फिलहाल प्रदेशभर की जेलों में 49 हजार से अधिक कैदी सजा काट रहे हैं, जिसके चलते जेल की बैरक और सेल में पैर रखने तक की जगह नहीं है। जेलों में अगर तेजी से संक्रमण फैला तो स्थिति विस्फोटक हो जाएगी, जिसके चलते जेल मुख्यालय एक बार फिर आपातकालीन पैरोल लागू करके आठ से दस हजार कैदियों को छोडऩे पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

कोरोना काल में या तो अपराध बढ़ रहे हैं या फिर अपराधी, जिन्हें पुलिस कोर्ट में पेश कर रही है। कोर्ट अपराधियों के प्रति सख्त रवैया अपनाते हुए उन्हें जमानत पर छोडऩे के बजाय सीधे जेल वारंट काट रही है। इससे प्रदेशभर की जेलों में कैदियों की स्थिति क्षमता से अधिक हो गई है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 10 बड़ी सेंट्रल जेल हैं। वहीं छोटी-बड़ी उपजेल और जिला जेल मिलाकर इनकी संख्या 200 के आसपास है। इन जेलों में 28375 कैदी रखने की क्षमता है, जबकि अभी 49 हजार कैदी जेलों में सजा काट रहे हैं। मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार अधिकांश जेलों में अभी क्षमता से अधिक कैदियों को रखा जा रहा है। इसके कारण जेलें कैदियों से ठसाठस हो गई हैं और बैरकों तथा सेल में कैदियों को रखने तक की जगह नहीं है। कुछ जेलों में कैदियों को बाहर बरामदे में रखा जा रहा है। चूंकि कोरोना संक्रमण का दौर चरम पर है, लिहाजा हजारों नए कैदियों को आइसोलेशन वार्ड में भी रखा गया है, ताकि इन कैदियों के कारण जेल के अंदर पुराने कैदियों में कोरोना वायरस का संक्रमण न फैले। मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार अगर इसी तरह की स्थिति रही तो जेल प्रशासन एक बार फिर आपातकालीन पैरोल लागू करके आठ से दस हजार कैदियों को रिहा कर सकता है और जेलें खाली कर सकता है।
अधिकांश उपजेलों में नए कैदियों की आमद बंद की
जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से अधिक होने के कारण प्रदेश की अधिकांश उपजेल और जिला जेलों ने नए कैदियों की आमद पर रोक लगा दी है। इंदौर की जिला जेल में भी पिछले कई दिनों से नए कैदियों को नहीं लिया जा रहा है और उन्हें सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया जा रहा है। इधर जेल मुख्यालय कैदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब अस्थाई जेलें कुछ समय के लिए खोलने पर भी विचार कर रहा है। इंदौर में सांवेर रोड स्थित वैष्णव कालेज का चयन अस्थाई जेल के लिए किया गया है।
प्रदेशभर की जेलों में अभी क्षमता से अधिक कैदी हैं। चूंकि अभी कोरोना वायरस के संक्रमण का दौर चल रहा है, ऐसे में जेल प्रशासन के लिए यह चिंता का विषय है कि अगर जेलों में संक्रमण फैल गया तो स्थिति खतरनाक हो जाएगी। जिन जेलों में कैदियों की क्षमता कम है, वहां अन्य जेलों के कैदियों की शिफ्टिंग भी की जाएगी। वहीं बड़े शहरों में अस्थाई जेलों को भी शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
संजय पांडे, डीआईजी, जेल मुख्यालय, भोपाल

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