
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बुरहानपुर जिले (Burhanpur district) के निंबोल गांव (Nimbol Village) की कुछ महिलाओं (women) ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो छोटे से काम से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। गांव की पांच महिलाओं ने मिलकर सिर्फ ₹40,000 से एक छोटा सा होटल शुरू किया था, जिसे उन्होंने नाम दिया – “दीदी कैफे”। आज यही छोटा सा काम उन्हें हर साल 5 से 6 लाख रुपये की कमाई दे रहा है।
इन महिलाओं को यह प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से मिली। पहले ये सभी महिलाएं घर के काम तक ही सीमित थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ट्रेनिंग मिली और उन्होंने अपने साथ चार और महिलाओं को जोड़ लिया। सभी ने मिलकर थोड़े-थोड़े पैसे जमा किए और कुल ₹40,000 इकट्ठा करके “दीदी कैफे” शुरू किया। पिछले करीब पांच साल से ये महिलाएं मिलकर कैफे चला रही हैं। यहां स्वादिष्ट और शुद्ध शाकाहारी खाना बनाया जाता है, जिसे लोग काफी पसंद करते हैं।
शुरुआत में समय कठिन था। खुशबू तिवारी बताती हैं कि कई दिन ऐसे भी गुजरे जब कैफे में एक भी ग्राहक नहीं आता था, लेकिन महिलाओं ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं। धीरे-धीरे लोगों को इनके हाथ का खाना पसंद आया और अब कैफे में अच्छी खासी भीड़ रहती है।
आज इन महिलाओं की पहचान सिर्फ कैफे तक सीमित नहीं है। सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों में भी उन्हें खाना बनाने के ऑर्डर मिलने लगे हैं। त्योहारों में ये महिलाएं मिठाइयां बनाकर ऑर्डर पर देती हैं, जिससे उनकी सालाना कमाई 5-6 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
निंबोल की इन महिलाओं की मेहनत अब आसपास के गांवों में प्रेरणा का स्रोत बन गई है। कई अन्य महिलाएं इनके अनुभव से प्रेरित होकर अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने की सोच रही हैं। यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और हौसला होने पर गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं और अपनी जिंदगी बदल सकती हैं।
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