
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पूरे कैंपस में हलचल मचा दी है। यह घटना विश्वविद्यालय के कैंपस में मौजूद कैंटीन (canteen) से जुड़ी है जहां छात्रों ने खाने में गड़बड़ी का गंभीर आरोप (Serious Allegations)लगाया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब इंजीनियरिंग के कुछ छात्र कैंटीन में खाना खा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि उनकी सब्जी में एक मरी हुई छिपकली दिखाई दी जिससे वे तुरंत घबरा गए और कैंटीन स्टाफ से शिकायत की। छात्रों का कहना है कि इस घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया क्योंकि यह सीधे तौर पर उनकी सेहत से जुड़ा हुआ मामला था।
हालांकि, इसके बाद जो हुआ उसने इस मामले को और ज्यादा विवादास्पद बना दिया। आरोप है कि जब छात्रों ने हंगामा किया तो कैंटीन स्टाफ के एक कर्मचारी ने उस कथित छिपकली को उठाकर सबके सामने अपने मुंह में डाल लिया और चबा कर निगल गया। इसके बाद उसने दावा किया कि यह छिपकली नहीं बल्कि शिमला मिर्च का टुकड़ा था। इस अजीब हरकत ने छात्रों को और भी हैरान कर दिया और मामला तेजी से तूल पकड़ गया।
इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो सामने आने के बाद लोग इस घटना पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं जबकि कुछ इसे गलतफहमी का मामला बता रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना 18 मार्च की बताई जा रही है जब कैंपस में मौजूद कैंटीन में यह पूरा विवाद हुआ। छात्रों का कहना है कि इस तरह की घटना के बाद उनकी सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और वे तब तक कैंटीन को बंद करने की मांग कर रहे हैं जब तक पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया है। विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और अगर किसी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना सिर्फ एक कैंटीन विवाद नहीं बल्कि यह दर्शाती है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों का कितना महत्व है। छात्रों की सेहत और सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे मामलों में पारदर्शी और तेज कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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