
- 17 साल पहले लागू हुआ था नियम, केवल कागजों पर दिखा रहे-कैसे बढ़े भू जल स्तर
उज्जैन। शहर में बारिश के पानी को जमीन में उतारने के लिए 17 वर्ष पहले बनाए गए नियम अब भी कागजों तक सीमित हैं। बिल्डिंग परमिशन के दौरान अनिवार्य रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को करीब 80 फीसदी मकानों ने लागू ही नहीं किया गया है।
उल्लेखनीय है कि निगम ने 2012 में 140 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण पर वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य किया था। बिल्डिंग परमिशन लेने वालों से रिफंडेबल राशि के नाम पर करोड़ों रुपए भी जमा हैं, लेकिन लोगों ने पैसा वापस लेने में रुचि नहीं दिखाई। निगम, पीडब्ल्यूडी और स्मार्ट सिटी ने शुरुआती दौर में कुछ काम किए, लेकिन निगरानी के अभाव में जहां हैं वहां केवल पाइप तक सीमित हैं। नियम तो यह है कि यदि किसी भवन में हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण नहीं होने पर निगम की जिम्मेदारी है कि भवन मालिक के खर्च पर सिस्टम लगवाए। लेकिन उज्जैन नगर निगम के पास इसकी जांच के लिए कोई मॉनिटरिंग बॉडी नहीं होने के चलते न तो भवनों में सिस्टम लगता है, और न ही लोगों के पैसे वापस मिलते है। बता दें कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग बारिश के पानी को इक_ा करने वाला एक सिस्टम है। ताकि वर्षा जल बर्बाद होने के बजाय भविष्य में इस्तेमाल किया जा सके। 27 अक्टूबर 2009 से लागू नियम म.प्र भूमि विकास नियम 1984 की धारा 78(4) के तहत पारित हुआ था। इसके मुताबिक नगर निगम जमीन के आकार के मुताबिक हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए डिपॉजिट राशि जमा करवाता है। ये राशि नगर निगम में नक्शा पास कराने के समय ली जाती है। और सिस्टम लगने के बाद रिफंड हो जाती हैं। जाहिर है कि रेन वाटर सिस्टम के लिए निगम को गंभीरता दिखाना चाहिए और जमीनी स्तर पर कार्रवाई करना चाहिए।
निगम का हार्वेस्टिंग शुल्क
एरिया राशि
140-200 वर्ग मीटर 7000
200 से 300 वर्ग मीटर 10000
300 से 400 वर्ग मीटर 12000
400 से ऊपर 15000