
नई दिल्ली. पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष के बीच भारत (India) का एक और एलपीजी टैंकर (LPG Tanker) ‘ग्रीन सान्वी’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पार कर आगे बढ़ रहा है. शिप-ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म वेसेलफाइंडर (VesselFinder) के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद यह सातवां भारतीय एलपीजी कैरियर है जो इस बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग से गुजर रहा है. डेटा के मुताबिक, ‘ग्रीन सान्वी’ लारक-केश्म चैनल के रास्ते आगे बढ़ रहा है, जो होर्मुज का अपेक्षाकृत सुरक्षित मार्ग माना जाता है.
जहाज ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) एक्टिव कर रखा है, जिससे उसकी लोकेशन लगातार ट्रैक की जा रही है. ‘ग्रीन सान्वी’ के डेस्टिनेशन सिग्नल में ‘इंडियन शिप, इंडियन क्रू’ संदेश दिखा रहा है, जिसे हाल के दिनों में भारतीय जहाजों द्वारा संभावित खतरे से बचने के लिए अपनाई जा रही रणनीति माना जा रहा है, ताकि उन्हें संभावित हमलों या गलत पहचान के खतरे से बचाया जा सके. वहीं, ‘जग विक्रम’ और ‘ग्रीन आशा’ नाम के दो अन्य एलपीजी टैंकर अब भी होर्मुज के पास फंसे हुए हैं.
दोनों जहाज पहले ‘ग्रीन सान्वी’ के करीब ही देखे गए थे. लेकिन ‘ग्रीन सान्वी’ ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया है, वहीं ये दोनों जहाज अब भी अपनी लोकेशन बनाए हुए हैं. इससे संकेत मिलता है कि सुरक्षा या ऑपरेशनल कारणों से इन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली है. इससे पहले ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’, ‘जग वसंत’, ‘BW टायर’, ‘BW एल्म’ और ‘पाइन गैस’ जैसे छह एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से भारतीय तट तक पहुंच चुके हैं.
लगभग 58,811 मीट्रिक टन क्षमता वाला ‘ग्रीन सान्वी’ भी बड़े एलपीजी कैरियर्स की श्रेणी में आता है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से अहम है. रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 15 भारतीय जहाज अब भी होर्मुज के पश्चिम में फंसे हुए हैं, जिनमें तेल और गैस लोड है. होर्मुज पार करके भारत की ओर बढ़ रहा ‘ग्रीन सान्वी’ किसी पोर्ट पर आएगा, इसके बारे में अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकता है. भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में इन टैंकरों का सुरक्षित पहुंचना घरेलू गैस सप्लाई, कीमतों की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.
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