
नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर वैश्विक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ईरान (Iran) ने अमेरिका (America) को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर समुद्री नाकेबंदी जारी रही तो वह जवाबी कदम उठाएगा।
इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए एक दर्जन से अधिक देश मिलकर रक्षा मिशन में शामिल होने को तैयार हैं। फ्रांस और ब्रिटेन की अध्यक्षता में पेरिस में 49 देशों की बैठक हुई, जिसमें बहुराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे पर चर्चा की गई।
वैश्विक सुरक्षा मिशन की तैयारी तेज
लंदन और पेरिस में चल रही कूटनीतिक और सैन्य बैठकों में इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने की योजना पर मंथन हो रहा है। अगले हफ्ते लंदन में एक सैन्य योजना सम्मेलन भी प्रस्तावित है, जिसमें मिशन की संरचना और देशों की भागीदारी तय की जाएगी। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों ने इस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है, क्योंकि होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
ईरान का सख्त रुख और शर्तें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि जलमार्ग को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोला जाएगा, लेकिन ईरानी नियमों के तहत। वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्पष्ट किया है कि सभी जहाजों को गुजरने के लिए अनुमति लेनी होगी। ईरान ने यह भी कहा है कि सैन्य जहाजों के प्रवेश पर रोक रहेगी और केवल तय ईरानी मार्गों से ही नागरिक जहाजों को गुजरने दिया जाएगा।
अमेरिका से तनाव और कड़ी चेतावनी
ईरान ने आरोप लगाया है कि अगर उसके बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव और नाकेबंदी जारी रही तो वह सख्त जवाब देगा। तेहरान ने संकेत दिया है कि उसके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में कूटनीतिक रुख और कठोर होगा। हालांकि लेबनान में संघर्षविराम के बाद कुछ नरमी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन ईरान ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा शर्तों पर किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार किया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज जलमार्ग में तनाव से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ रहा है। लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।
शिपिंग एसोसिएशन BIMCO ने चेतावनी दी है कि समुद्री मार्ग की स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। ऐसे में वैश्विक बाजारों की नजर लंदन में होने वाली अगली सैन्य बैठक पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और सैन्य सहयोग से ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित किया जा सकेगा या नहीं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved