कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal, Assembly Elections) में इस बार अर्जुन सिंह अपने खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सुर्खियों में हैं। भाजपा (BJP) उम्मीदवार ने अपने हलफनामे में खुलासा किया है कि उन पर कुल 119 आपराधिक मामले लंबित हैं, जबकि 2019 में यह संख्या 24 थी। इस बड़े अंतर ने चुनावी बहस को और तेज कर दिया है।
‘मुकदमों की सेंचुरी’ और सियासी चर्चा
नुआपाड़ा सीट से मैदान में उतरे अर्जुन सिंह को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं भी कम दिलचस्प नहीं हैं। आम बोलचाल में लोग कहते हैं कि उन्हें इतने नोटिस मिलते हैं कि वे उन कागजों में झालमुड़ी खाकर फेंक देते हैं। हालांकि यह महज लोकल कहावत है, लेकिन इससे उनकी ‘बाहुबली’ छवि को लेकर बनी धारणा झलकती है।
पूर्व सांसद अर्जुन सिंह ने 93 पन्नों का विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने अपनी आय, संपत्ति और देनदारियों का पूरा ब्योरा दिया है। इसमें पिछले पांच वर्षों में उनकी आय में उतार-चढ़ाव भी सामने आया है।
उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर
अर्जुन सिंह का राजनीतिक करियर कई मोड़ों से गुजरा है।
शुरुआत कांग्रेस से
फिर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर भाटपाड़ा से चार बार विधायक
2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर बैरकपुर से सांसद बने
2019 में उन्होंने दिनेश त्रिवेदी को हराया, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में पार्थ भौमिक से हार गए।
हमले और विवाद
2024 चुनाव के बाद उनके घर पर बमबाजी और फायरिंग की घटना भी सामने आई थी, जिसमें वे घायल हुए थे। इस घटना ने उनकी सुरक्षा और राजनीतिक तनाव को और उजागर किया।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप
अर्जुन सिंह के खिलाफ मामलों की बड़ी संख्या को लेकर विपक्ष हमलावर है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक साजिश करार दे रही है।
कुल मिलाकर, अर्जुन सिंह का हलफनामा सिर्फ एक उम्मीदवार का ब्योरा नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में अपराध, छवि और चुनावी रणनीति पर चल रही बड़ी बहस को भी सामने लाता है। आने वाले नतीजों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इन मुद्दों को किस नजर से देखते हैं।
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