
इंदौर, राजेश ज्वेल। विगत कुछ वर्षों में इंदौर में 100 से अधिक हाईराइज बिल्डिंगों के प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। मगर पहली बार 45 मीटर ऊंची बिल्डिंग का अभिन्यास नगर तथा ग्राम निवेश ने निरस्त कर दिया है। छुपाए गए तथ्यों के विपरित मूसाखेड़ी की एक दर्जन से अधिक खसरों की ढाई लाख स्क्वेयर फीट जमीन पर यह प्रोजेक्ट मंजूर करवाया। मगर जमीनी जादूगरों ने जहां अवैध कॉलोनी के बिके भूखंडों को खरीदा, वहीं 25 फीट चौड़ी रोड को ही गायब कर डाला। इतना ही नहीं पहले रोड दिखाकर भूखंड बेचे, फिर भवन अनुज्ञा भी प्राप्त कर ली। उक्त प्रोजेक्ट क्रिफ्टन हाईराइज के नाम से मंजूर करवाया और पूर्व में दो बार अभिन्यास संशोधित भी करवाए गए। संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश ने अभिन्यास को रिवॉक यानी प्रतिसंहत करने की पुष्टि भी की है।
सबसे अधिक हाईराइज प्रोजेक्ट सुपर कॉरिडोर पर 30 से ज्यादा मंजूर हुए, तो निगम सीमा के अलावा पंचायत क्षेत्रों में भी व्यवसायिक और रहवासी हाईराइज बिल्डिंगें निर्मित की गई। मूसाखेड़ी में खसरा नम्बर 452/3/3/1, 452/4, 452/5 से लेकर 455/1/7/2 की एक दर्जन से अधिक खसरे की जमीन, जिसका रकबा 2.358 हेक्टेयर यानी ढाई लाख स्क्वेयर फीट से अधिक होता है। उस पर नगर तथा ग्राम निवेश से मल्टी ड्वेलिंग आवासीय विकास की अनुमति प्राप्त की गई। खानचंद वल्लभानी ने वर्टिकल होम्स एलएलपी तर्फे पार्टनर ज्ञानशीला डवलपर्स तर्फे कुलभूषण मित्तल, श्रीमती मनीषा गर्ग, सुशीला रानी मित्तल, विद्युत मित्तल, ऋतु गर्ग के नाम से उक्त अभिन्यास मंजूर करवाया, जिसमें 7.50 मीटर यानी 25 फीट चौड़ी रोड पूर्व के मंजूर अभिन्यास में दर्शाई गई और बाद में जब हाईराइज का अभिन्यास मंजूर करवाया तो उसमें यह रोड ही गायब कर दी गई। नगर तथा ग्राम निवेश ने 29 अप्रैल 2025 को जो अभिन्यास मंजूर किया उसमें ब्लॉक ए और ब्लॉक बी के अलावा लोकल शॉप सहित ओपन पार्क, सर्विस एरिया व अन्य गतिविधियों को पार्क मार्क करते हुए 45 मीटर ऊंची बिल्डिंग बनाने की अनुमति दी गई।
मगर इस अभिन्यास में होशियारी से 25 मीटर रोड को दर्शाया ही नहीं गया, जबकि पूर्व में मंजूर किए गए अभिन्यासों में यह रोड स्पष्ट रूप से बताई गई, जिसके चलते अक्षरधाम कॉलोनी के अलावा श्री स्वामी नारायण परिसर से जुड़े लोगों ने नगर तथा ग्राम निवेश को इसकी शिकायत की, जिसमें कहा गया कि मूसाखेड़ी के सर्वे नम्बर 453, 454 और 455 पर 25 साल पहले अवैध कॉलोनी बनी, जिसके नक्शे में साढ़े 7 मीटर चौड़ी सड़क दर्शाई गई और उसे दिखाकर ही भूखंडों का विक्रय किया गया। मगर नगर तथा ग्राम निवेश से हाईराइज का जो स्थल अनुमोदन यानी अभिन्यास मंजूर करवाया गया उसमें असत्य और भ्रामक जानकारी दी गई और रोड को भी गायब कर दिया गया और स्वीकृत मानचित्र में निर्मित मार्ग की भूमि को एमओएस की भूमि बताकर भवन अनुज्ञा प्राप्त की गई।
इतना ही नहीं, रोड के पहले 5-5 हजार स्क्वेयर फीट के भूखंड जो बेचे गए उसमें भी दी गई अनुमति में रोड को दर्शाया गया है। इसी तरह श्री स्वामी नारायण परिसर के अध्यक्ष एके शर्मा ने अपनी शिकायत में कहा कि सर्वे नम्बर 454 और 455 की 2.220 हेक्टेयर जमीन सदस्यों को आबंटित की गई, जिसे 30 मीटर रोड से सीधे 12 मीटर रोड के माध्यम से पहुंच प्राप्त थी। मगर क्रिफ्टन हाईराइज को 29.04.2025 को जो अनुमति दी गई, उसके चलते उक्त रोड अवरुद्ध कर दिया गया। हालांकि इन शिकायतों के जवाब में खानचंद्र वलभानी ने सफाई भी दी कि कोई रोड अवरुद्ध नहीं किया गया और मंजूर अभिन्यास की जमीन निजी लोगों से ही खरीदी गई। मगर दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर नगर तथा ग्राम निवेश ने पाया कि रोड को होशियारी से मंजूर अभिन्यास में नहीं दर्शाया गया और अवैध रूप से भूखंडों को भी खरीदा गया, जिसके चलते संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश सुशोभन बनर्जी ने अभी पिछले दिनों ही मंजूर किए गए अभिन्यास को प्रतिसंहत करने का आदेश जारी किया। इसमें अपने 4 पेज के आदेश में संयुक्त संचालक ने माना कि अनुमोदित अभिन्यासों से स्पष्ट है कि प्रश्राधीन जमीन पर मार्ग निर्मित है और इसे शामिल करते हुए अभिन्यास प्रस्तुत किया जाना था, जो कि नहीं किया और तथ्यों को छुपाकर अनुमति हासिल की गई।
अक्षर धाम कॉलोनी के अवैध भूखंडों को भी खरीद लिया
बीते कई वर्षों से चर्चित अक्षर धाम के पीड़ित भी जनसुनवाई से लेकर शासन स्तर तक शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन इस कॉलोनी से जुड़े जादूगरों ने अवैध रूप से जमीनें बेच डाली और जो हाईराइज का नक्शा मंजूर करवाया, उसके लिए भी कुछ भूखंडों की जमीनें खरीदकर शामिल कर ली। अक्षरधाम सोसायटी में तीन गृह निर्माण संस्थाओं अमृता, गणपति और मेघना गृह निर्माण की जमीनें भी अवैध रूप से शामिल कर ली गई। खसरा नम्बर 461/2, 459 और 463/5 सहित अन्य खसरा नम्बरों पर 800 से अधिक भूखंड काटकर बेच दिए और बगीचे, रोड सहित अन्य जमीनें भी गायब कर डाली। ऑपरेशन भूमाफिया के वक्त भी इस कॉलोनी को लेकर शिकायतें हुईं और प्रशासन ने अपनी जांच में भी फर्जीवाड़ा पाया।
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