
कई ने आवासीय भूखंड का व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया तो किसी ने अवैध निर्माण कर लिया…
इंदौर। इंदौर (Indore) नगर निगम (Municipal council) के अधिकारियों को यह अच्छी तरह से मालूम है कि जनता (People) के काम होने से किस तरह से रोका जा सकता है। इसी प्रक्रिया के तहत अब लीज के नवीनीकरण में अवैध निर्माण (Illegal Construction) की जांच करना शुरू कर दिया गया है।
नगर निगम द्वारा शहर में अनेक स्थानों पर लोगों को जमीन लीज पर दी हुई है। यह जमीन 30 साल के लिए दी गई है। पहले तो निगम द्वारा लीज के नवीनीकरण का काम किया ही नहीं जा रहा था। अब निगम की ओर से यह दावा किया गया है कि लीज का नवीनीकरण किया जा रहा है तो इस दावे के कारण बड़ी संख्या में लोगों द्वारा नवीनीकरण के लिए आवेदन लगा दिए गए हैं। अब आवेदन आने के बाद इस काम को करने से रोकने में निगम के अधिकारियों ने अपना दिमाग लगा दिया है। एक नई कसरत यह शुरू की गई है कि लीज की संपत्ति पर किए हुए निर्माण की जांच की जा रही है। अब तक तो जब भी लीज के नवीनीकरण का आवेदन आता था तो उसमें केवल यह देखा जाता था कि जमीन उपयोग के लिए लीज पर दी गई है और उसका क्या उपयोग हो रहा है इसमें भी इस बात पर ध्यान होता था कि कहीं आवासीय उपयोग के लिए दी गई जमीन का व्यावसायिक उपयोग तो नहीं किया जा रहा है। इस एक तथ्य के परीक्षण के साथ में प्रकरण को नवीनीकरण के लिए आगे बढ़ा दिया जाता था। अब निगम के अधिकारियों द्वारा लीज नवीनीकरण का आवेदन प्राप्त होने पर संबंधित क्षेत्र के भवन अधिकारी से इस बात की रिपोर्ट ली जाती है कि इस स्थान पर निर्मित किए गए भवन की जांच करके यह बताएं कि क्या पूरा भवन स्वीकृत भवन अनुज्ञा के अनुरूप ही बना है और उसमें कहीं कोई अवैध निर्माण नहीं हुआ है। अब यह तो निश्चित है कि यदि कोई भी भवन बनकर तैयार होता है तो वह केवल और केवल भवन अनुज्ञा कि स्वीकृति के अनुसार नहीं बन सकता है, उसमें कहीं न कहीं कुछ न कुछ ऐसा निर्माण होता है, जो अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है। जब जोनल कार्यालय के भवन अधिकारी की ओर से लीज की जमीन पर बने हुए भवन में अवैध निर्माण की रिपोर्ट आती है तो फिर उस जमीन की लीज के नवीनीकरण की फाइल को बंद कर दिया जाता है। इस तरह नगर निगम के लीज विभाग द्वारा लीज नवीनीकरण के सैकड़ों आवेदन को नवीनीकरण की प्रक्रिया में जाने से रोक दिया गया है। अब तो लीज शाखा में भवन अधिकारी के रूप में अंकेश बिरथरिया को नियुक्त भी कर दिया गया है। नवीनीकरण के हर आवेदन पर उनसे भी रिपोर्ट ली जाने लगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर हर आवेदन को नस्तीबद्ध करने का काम किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों को कोई मतलब नहीं
शहर में लीज की संपत्ति का नगर निगम द्वारा नवीनीकरण किया जाए या नहीं किया जाए और नामांतरण चाहे रुका हुआ रहे, लेकिन ऐसे मामलों से किसी जनप्रतिनिधि को कोई सरोकार नहीं होता है। नगर निगम लीज शाखा में अधिकारी अपनी मनमानी करें तो भी उन्हें रोकने-टोकने का काम करने के लिए न तो महापौर सक्रिय होते हैं और न ही निगम आयुक्त के पास इस तरफ ध्यान देने का वक्त होता है। ऐसे में नागरिक परेशान होते रहते हैं और उनकी इस परेशानी का कोई अंत नहीं रहता है।