नई दिल्ली। बचपन में पढ़ी गई कविता “मछली जल की रानी है” लगभग हर किसी को याद होगी, लेकिन प्रकृति की दुनिया में कुछ जीव ऐसे भी हैं जो इस धारणा को पूरी तरह बदल देते हैं। दुनिया में मछलियों (Shameless) की हजारों प्रजातियां (Species) मौजूद हैं, मगर इनमें एक ऐसी अनोखी मछली भी है जो पानी खत्म होने पर मरती नहीं, बल्कि सालों तक मिट्टी में दफन होकर जिंदा रह सकती है। वैज्ञानिक इसे “अफ्रीकन लंगफिश” के नाम से जानते हैं। हैरानी की बात यह है कि लंबे समय तक पानी में डूबे रहने पर इसका दम भी घुट सकता है।
अफ्रीका के दलदली और मौसमी तालाबों में मिलने वाली अफ्रीकन लंगफिश को धरती के सबसे अद्भुत जीवों में गिना जाता है। जब गर्मी में तालाब और नदियां सूख जाती हैं, तब यह मछली गीली मिट्टी में खुद को दबाकर लंबे समय तक जीवित रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह चार साल या उससे ज्यादा समय तक बिना खुले पानी के जीवित रहने में सक्षम है।
पानी सूखने पर लंगफिश अपने मुंह से मिट्टी खोदकर गड्ढा बनाती है। इसके बाद शरीर से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ से अपने चारों ओर एक कठोर कोकून तैयार कर लेती है। इस प्रक्रिया को “एस्टिवेशन” कहा जाता है, जो गर्मी के मौसम की लंबी निष्क्रिय अवस्था मानी जाती है। कोकून के भीतर यह बेहद धीमी गति से जीवित रहती है और ऊपर हवा लेने के लिए छोटा सा छेद छोड़ देती है।
इस जीव की सबसे खास बात यह है कि इसके पास फेफड़ों जैसी संरचना होती है। यही वजह है कि यह पानी में घुली ऑक्सीजन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहती, बल्कि सीधे हवा से सांस ले सकती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यही क्षमता इसे अन्य मछलियों से अलग बनाती है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के दौरान यह अपने शरीर की ऊर्जा बचाने के लिए मेटाबॉलिज्म बेहद धीमा कर देती है।
अफ्रीकन लंगफिश का व्यवहार सामान्य मछलियों से बिल्कुल उल्टा है। यह हवा से सांस लेने की आदी हो चुकी है, इसलिए यदि इसे लंबे समय तक पानी के अंदर रहने पर मजबूर किया जाए तो ऑक्सीजन की कमी से इसकी मौत भी हो सकती है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे विचित्र मछलियों में गिना जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि लंगफिश लगभग 40 करोड़ साल पुरानी प्रजाति है। यह डायनासोर के दौर से भी पहले पृथ्वी पर मौजूद थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसानों समेत चार पैरों वाले जीवों के विकासक्रम को समझने में भी यह मछली अहम कड़ी मानी जाती है।
लंगफिश अकेली ऐसी मछली नहीं है। दुनिया में कई और प्रजातियां भी हैं जो पानी के बाहर लंबे समय तक जीवित रह सकती हैं। इनमें मडस्किपर, वॉकिंग कैटफिश, क्लाइंबिंग पर्च और स्नेकहेड जैसी मछलियां शामिल हैं। कुछ अपनी त्वचा से सांस लेती हैं, तो कुछ शरीर के विशेष अंगों की मदद से हवा से ऑक्सीजन प्राप्त करती हैं।
प्रकृति के ये अनोखे जीव बताते हैं कि धरती पर जीवन ने परिस्थितियों के अनुसार खुद को कितने अलग-अलग तरीकों से ढाला है।
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