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दुनिया का एकमात्र शुद्ध शाकाहारी शहर जहां नॉन-वेज खाना या बेचना है ‘गुनाह’, जानें कहां है…

May 12, 2026

नई दिल्ली. आजकल ज्यादातर लोग नॉनवेज (Non-vegetarian) बड़े चाव से खाते हैं. ऐसे में पूरी दुनिया (world) में शाकाहारी (vegetarian) खाने के साथ ही नॉनवेज खाने की भी तरह-तरह की डिशेज परोसी जाती हैं. लेकिन अगर हम कहें कि आपको ग्लोब पर एक ऐसे देश या शहर पर हाथ लगाना है, जहां नॉनवेज पूरी तरह से बैन है तो क्या आप कर पाएंगे? ये लाइन पढ़कर आपके दिमाग में ये आएगा कि क्या बकवास कर रहे हैं ऐसा कोई देश या शहर हो ही नहीं सकता है. अगर आपके दिमाग में भी कुछ ऐसा ही आया है, तो आप गलत हैं. दुनिया में एक ऐसा शहर मौजूद है, जहां कि गलियों में बने किसी भी होटल में आपको न तो कोई कबाब की खुशबू आती है और न ही मेन्यू में ऑमलेट का नाम मिलता है.

जी हां, ये शहर विदेश में नहीं बल्कि भारत की मिट्टी पर बसा एक ऐसा शहर है, जहां नॉन-वेज खाना तो दूर, उसे बेचना या खरीदना भी आपको सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है. दुनिया के नक्शे पर ये इकलौता ऐसा शहर है जिसे पूरी तरह शाकाहारी घोषित किया गया है. क्या आप जानते हैं इस शुद्ध शाकाहारी शहर का नाम और इसके पीछे की दिलचस्प कहानी? चलिए, आज आपको सैर कराते हैं भारत के उस कोने की जिसने अपनी सादगी से पूरी दुनिया को चौंका दिया है.


  • पालीताना: दुनिया का इकलौता ‘शुद्ध शाकाहारी शहर’
    दुनिया का इकलौता ‘शुद्ध शाकाहारी शहर’ गुजरात के भावनगर जिले में स्थित पालिताना है. इस शहर में नॉनवेज न मिलने के पीछे कोई कड़ा नियम या ट्रेंड नहीं है, बल्कि यहां के लोगों के दिलों बसा अहिंसा का सिद्धांत है. ये शहर दुनिया के सामने अहिंसा का सबसे बड़ा उदाहरण है. यहां मांस, मछली या अंडे खाना और बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी है. यहां अगर कोई नियमों का उल्लंघन करके मांसाहारी खाना बेचते या परोसते पकड़ा जाता है, तो उसे न केवल भारी जुर्माना देना पड़ता है, बल्कि जेल की सजा भी हो सकती है.

    शहर के छोटे से छोटे ढाबे से लेकर बड़े रेस्टोरेंट्स तक, हर जगह केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है. इसी वजह से आज पालिताना को पूरी दुनिया में ‘वेजिटेरियन सिटी ऑफ द वर्ल्ड’ के नाम से पहचाना जाता है.

    क्यों लगाया गया नॉन-वेज पर पूरी तरह बैन?
    पालिताना में भी पहले नॉन-वेज परोसा जाता था, लेकिन साल 2014 में कुछ ऐसा हुआ जिसने शहर में मिलने वाले खाने की तस्वीर बदलकर रख दी. दरअसल, जैन समुदाय के कई साधुओं ने शहर में मिलने वाले नॉन-वेज को को लेकर भूख हड़ताल शुरू की. उनकी मांग थी कि शहर में चल रही कसाई की दुकानों को बंद किया जाए और किसी भी तरह की जीव हत्या पर पूरी तरह रोक लगाई जाए.

    ये आंदोलन काफी दिनों तक चला, जिसके बाद सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार कर लिया और शहर में मांस की बिक्री पर रोक लगा दी गई. इसके साथ ही जानवरों की हत्या को गैरकानूनी घोषित किया गया और नॉन-वेज खाने पर भी पूरी तरह बैन लगा दिया गया. इन सख्त नियमों के लागू होने के बाद पालिताना पूरी तरह शाकाहारी शहर बन गया, जिसकी पहचान आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अलग तरीके से की जाती है.

    खाने में क्या है खास?
    पलिताना में नॉन-वेज पूरी तरह बैन है इसका मतलब ये नहीं है कि यहां की गलियों से स्वाद पूरी तरह से गायब है. यहां स्वाद से भरपूर खाने की कोई कमी नहीं है. यहां के लोग और यहां जाने वाले टूरिस्ट ट्रेडिशनल गुजराती डिशेज का पूरी तरह से मजा ले सकते हैं. यहां पर ढोकला, खांडवी, दाल-ढोकली, खिचड़ी और सेव-टमाटर की सब्जी जैसी डिशेज मिलती हैं. ये न सिर्फ स्वादिष्ट हैं, बल्कि हल्की और हेल्दी भी मानी जाती हैं.

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