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NEET: पेमेंट दो, सेलेक्शन की गारंटी शिवराज की… कैसे काम करता था मॉडल?

May 21, 2026

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले की जांच में लगातार नए पहलू सामने आ रहे हैं. जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरोपी शिवराज मोटेगावकर और उससे जुड़े नेटवर्क पर बेहद व्यवस्थित और पेशेवर तरीके से काम करने के आरोप हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कथित तौर पर आर्थिक स्थिति और भुगतान क्षमता के आधार पर छात्रों की पहचान की जाती थी और उसके बाद अभिभावकों से संपर्क साधा जाता था.

सूत्रों के मुताबिक, अभिभावकों को उनके बच्चों के चयन को लेकर भरोसा दिलाया जाता था और कथित तौर पर लाखों रुपये तक की डील की जाती थी. यह रकम 5 लाख रुपये से शुरू होकर 30 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंचने की बात सामने आ रही है. जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कुछ मामलों में अभिभावक ब्लैंक चेक देने तक के लिए तैयार थे. कथित तौर पर पहले एक टोकन राशि ली जाती थी और परीक्षा के बाद सवालों के मिलान की प्रक्रिया पूरी होने पर बाकी भुगतान किया जाता था.

एजेंसी सूत्रों का यह भी कहना है कि परीक्षा के बाद कुछ अभिभावकों ने यह शिकायत की थी कि उन्हें उपलब्ध कराए गए कथित प्रश्न बैंक और वास्तविक प्रश्नपत्र के कुछ हिस्सों में अंतर था खासकर फिजिक्स सब्जेक्ट में. जांच से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, कई डॉक्टरों के बच्चे भी ऐसे संस्थानों में पढ़ाई कर रहे थे और मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश को लेकर अभिभावकों की अपेक्षाएं काफी अधिक थीं. इसी वजह से कुछ लोग बड़ी रकम खर्च करने के लिए तैयार थे. जांच एजेंसियां अब ऐसे लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं, जिन पर कथित तौर पर पेपर खरीदने का संदेह है.


  • इस मामले के सामने आने के बाद लातूर के पूर्व परीक्षा परिणामों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. वर्ष 2024 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लातूर से नीट परीक्षा में शामिल हुए 24,496 छात्रों में 1,245 छात्रों ने 600 से अधिक अंक प्राप्त किए थे. इनमें 376 छात्रों ने 650 से अधिक अंक हासिल किए थे, जबकि 25 छात्रों ने 700 से ऊपर अंक प्राप्त किए थे. वहीं पांच छात्रों ने 710 से अधिक अंक हासिल किए थे. हालांकि, इन आंकड़ों और वर्तमान जांच के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं.

    CBI जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि NEET की प्रश्नपत्रिका पुणे से राजस्थान तक पहुंचाई गई थी. जांच एजेंसी को जानकारी मिली है कि पुणे के आरोपियों ने टेलीग्राम के जरिए प्रश्नपत्रिका की PDF फाइल गुरुग्राम मार्ग से राजस्थान के छात्रों तक पहुंचाई. सूत्रों के अनुसार, 150 सवालों के बदले करीब 10 लाख रुपये की डील हुई थी. इस पूरे नेटवर्क में कई राज्यों के लोगों की संलिप्तता होने की आशंका जताई जा रही है.

    मुख्य आरोपी शिवराज मोटेगांवकर की गिरफ्तारी के बाद अब उन छात्रों और अभिभावकों से भी पूछताछ शुरू हो गई है, जिन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर का फायदा उठाया. सीबीआई उन लाभार्थियों को बुलाकर पूछताछ कर रही है, जिनके नाम आरोपियों की पूछताछ में सामने आए हैं. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्रिका किन छात्रों तक पहुंची और इसके लिए कितना पैसा लिया गया. इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों पर अब आर्थिक कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है.

    CBI और ED ने आरोपियों की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है. जांच एजेंसियों ने पंजीकरण और मुद्रांक शुल्क विभाग से आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा है. पिछले दो दिनों से सीबीआई अधिकारी विभागीय कार्यालय पहुंचकर जानकारी जुटा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के नाम पर कहां-कहां और कितनी संपत्ति है, इसकी जांच की जा रही है. माना जा रहा है कि जांच के अगले चरण में अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई भी हो सकती है.

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