
इंदौर। प्रदेश सरकार भले ही कुपोषण के खिलाफ अभियान चला रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर में ही गर्भवती और धात्री महिलाओं को टेक होम राशन नहीं मिल पा रहा है। गर्भ में पल रहे शिशुओं को पोषण देने के लिए गर्भवतियों को पोषण आहार दिए जाने के सिर्फ वादे ही नसीब हो रहे हैं। इंदौर जिले के ग्रामीण और शहरी लगभग 11 परियोजनाओं में वितरण की समस्या सामने आ रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की उपलब्धता रिपोर्ट ने घर पर ले जाए जाने वाले पोषण आहार के पैकेट व्यवस्था की पोल खोल दी है।
रिपोर्ट के अनुसार इंदौर जिले की 11 परियोजनाओं में पोषण आहार उपलब्ध नहीं है, जिससे हजारों हितग्राही महिलाएं खाली हाथ ही लौट रही हैं। इंदौर ग्रामीण परियोजना 1, शहरी परियोजना 2, शहरी क्षेत्र की परियोजना 3, ग्रामीण 4, शहरी परियोजना 5, शहरी परियोजना 6, शहरी 7, इंदौर ग्रामीण परियोजना 1, इंदौर की ग्रामीण परियोजना 2, देपालपुर ग्रामीण 1 और देपालपुर ग्रामीण 2 शामिल हैं। इन परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों पर महिलाओं और बच्चों को नियमित रूप से मिलने वाला राशन सप्लाई नहीं होने से नहीं मिल पा रहा है।
आंकड़े मध्यप्रदेश की छवि खराब कर रहे
मुख्यमंत्री ने कुपोषण के मामलों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि टेक होम राशन वितरण व्यवस्था को लेकर लंबित निर्णय जल्द लिया जाए। अगली कैबिनेट बैठक में यह तय किया जाएगा कि पोषण आहार निर्माण और वितरण का कार्य निजी कंपनी के माध्यम से जारी रखा जाए या फिर इसकी जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को सौंपी जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को समय पर पोषण आहार मिल सके।
बड़वानी, धार और झाबुआ भी प्रभावित
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था और शिशु के शुरुआती वर्षों में पोषण की कमी का असर लंबे समय तक रहता है। आपूर्ति बाधित होने के गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इंदौर संभाग के अन्य जिलों की स्थिति भी खास अच्छी नहीं है। झाबुआ, धार, बड़वानी के कई क्षेत्रों में राशन नहीं पहुंच रहा है। मिली जानकारी के अनुसार रुक-रुककर कम मात्रा में आपूर्ति की जा रही है। महू, सागर क्षेत्र में पिछले 15 दिनों में राशन पहुंचाया गया है।
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