
- पेयजल का सही ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है प्लांट पर-ब्लीचिंग तो 6 महीने से नहीं है और क्लोरीन भी कभी-कभी डालते हैं
उज्जैन। शहर को पानी पिलाने में बड़ा घोटाला हो रहा है। पीने के पानी का ट्रीटमेंट प्लांट में सही ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। आवश्यक केमिकल भी पानी में नहीं डाले जा रहे हैं। ऐसे में पानी जनित बीमारियों का खतरा शहर में बढ़ रहा है। ऐसा लगता है अधिकारी उज्जैन को भी इंदौर जैसा भागीरथपुरा बनाना चाहते हैं।
गंभीर से पानी उज्जैन गऊघाट प्लांट पर आता है। यहाँ पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है और पीने के लायक पानी बन जाता है। उसके बाद ही पेयजल के रूप में इसे वितरित किया जाता है लेकिन आए दिन खराब पानी और पीला पानी नलों में आ रहा है लेकिन जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विगत 6 महीने से अधिक समय से पानी को साफ करने वाला ब्लीचिंग पाउडर जो पानी में डाला जाता है वह उपलब्ध ही नहीं है, जबकि बिल लगातार अधिकारियों द्वारा लगाए जा रहे हैं, वहीं क्लोरीन भी नियमित रूप से डालना चाहिए लेकिन वह भी कभी-कभी ही डाला जा रहा है। ऐसे में दूषित पानी को ही पीने लायक साफ पानी बताकर जनता को वितरित किया जा रहा है। इधर टाटा ने सीवर लाइन डालने के नाम पर शहर में कई जगह पेयजल की पाइपलाइन फोड़ दी है और जनता जब गंदा पानी की शिकायत संबंधित विभाग के अधिकारी को करती है तो वह टाटा का रोना रोते हैं और लाइन को ठीक करने में आनाकानी करते हैं। इधर ट्रीटमेंट प्लांट पर घोटाला हो रहा है और उधर फील्ड में भी काम नहीं हो रहा है। ऐसे में जनता गंदा और दूषित पानी पीने के लिए मजबूर है। शहर में हर दूसरे मोहल्ले में पेयजल पाइपलाइन लीकेज होने की शिकायत भी हो रही है। किसी दिन दूषित पानी से उज्जैन में भी भागीरथपुरा जैसा हादसा हो सकता है। निगम आयुक्त को चाहिए कि वह गऊघाट प्लांट का दौरा करें और वहाँ की व्यवस्थाएं देखें कि पानी को साफ करने के लिए जो केमिकल उपयोग किया जाते हैं वह पूरी मात्रा में है या नहीं और कितने दिनों से कौन सा केमिकल नहीं है, इसको भी देखें तो उन्हें पता चलेगा कि सिर्फ बिल लगाएँ जा रहे हैं और वास्तविक रूप में ब्लीचिंग और क्लोरीन पानी में बहुत काम डाले जा रहे हैं, जबकि इनका नियमित उपयोग होना चाहिए जिससे पानी साफ और शुद्ध रहे। जबकि पानी को साफ करने के लिए फिटकरी, ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन तथा अन्य केमिकल की सप्लाई बड़ी मात्रा में हो रही है और संबंधित का बिल भी लगातार भुगतान हो रहा है और इसमें प्लांट से जुड़े कई अधिकारी-कर्मचारी मिले हुए हैं।