
रांची । छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो (Student leader Devendranath Mahto) ने कहा कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाएं (All Examinations conducted by TDPL) रद्द की जाएं (Should be Cancelled) ।
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन शनिवार को 15वें दिन भी जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सैकड़ों छात्र धरने पर बैठे हैं। इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य और प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि शुक्रवार को सरकार के साथ पहली औपचारिक वार्ता हुई, लेकिन उससे कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। शनिवार को भी 8 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए गया था। मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रहेगा।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार से शुक्रवार शाम पहली औपचारिक वार्ता हुई थी, लेकिन उसमें केवल आश्वासन दिए गए। उन्होंने कहा, “वार्ता हो रही है, लेकिन सिर्फ दावा दिया जा रहा है। हमने संकल्प लिया है कि जो तत्काल मांगें हैं उन्हें तुरंत पूरा किया जाए और जिन मांगों को पूरा करने में समय लग सकता है, उन्हें तीन महीने के अंदर पूरा किया जाए। जो मांगे तत्काल पूरी होनी हैं, उनके पूरे होने तक मेरा अनशन जारी रहेगा।” उन्होंने बताया कि मुख्य मांग है कि टीडीपीएल (टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) एजेंसी द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाएं रद्द की जाएं और मामले की निष्पक्ष जांच हो। देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि झारखंड के गठन के बाद से ही छात्र पीड़ित हैं। यह कोई एक परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं है। जेपीएससी और जेएसएससी जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी करके नौकरी ली जा रही है। इससे सभी परेशान हैं। आज लंबे समय बाद छात्र एकजुट हुए हैं और देशभर के लोग इसका समर्थन कर रहे हैं।
धरने में शामिल एक अन्य छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा कि वे देवेंद्रनाथ की लीडरशिप में आगे बढ़ना चाहते हैं और मुख्यमंत्री से सीधी बात करना चाहते हैं। उनकी मांग है कि बातचीत खुले मंच पर, खुले ग्राउंड में हो ताकि पारदर्शिता बनी रहे। प्रेम नायक ने कहा, “एक छात्र 10×10 के कमरे में रहकर पढ़ता है, घर से चावल-दाल लाकर गुजारा करता है। अगर उसकी नौकरी 1 करोड़ रुपये या 80 लाख रुपये में बिक जाएगी तो गरीब छात्र कहां जाएगा? इसलिए इस आवाज को जोरदार तरीके से उठाना जरूरी है। यहीं से अर्थव्यवस्था गिरने लगती है। अगर कोई अधिकारी पैसे देकर और रिश्वत देकर नौकरी पाता है तो वह भ्रष्टाचार क्यों नहीं करेगा?”
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