
वॉशिंगटन। अंतरिक्ष (Space) के हजारों निष्क्रिय उपग्रह (Passive satellite), इस्तेमाल हो चुके रॉकेटों के हिस्से और टकराव से पैदा हुए मलबे के टुकड़े भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों (Space Missions) के लिए खतरा बन रहे हैं और इसी खतरे में निजी कंपनियां (Private Companies) नए कारोबारी अवसर तलाश रही हैं।
ऑर्बिट रडार के अनुसार अंतरिक्ष में करीब 30 हजार वस्तुओं को ट्रैक किया जा रहा है। इनमें लगभग 18,500 सक्रिय उपग्रह हैं, जबकि बाकी मलबा या इस्तेमाल हो चुके रॉकेट के हिस्से हैं। पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थिति तेजी से बदल रही है। यहां हजारों उपग्रहों के साथ दशकों की अंतरिक्ष गतिविधियों से पैदा हुआ मलबा भी मौजूद है। यही संकट अब अंतरिक्ष में एक नए सेवा उद्योग की नींव रख रहा है।
जापान की कंपनी एस्ट्रोस्केल ऐसे अंतरिक्ष यान विकसित कर रही है, जो कक्षा में जाकर निष्क्रिय वस्तुओं को पकड़ सकें और उन्हें हटाने में मदद करें। कंपनी ने कक्षा में दूसरे अंतरिक्ष यान से जुड़ने की क्षमता का प्रदर्शन भी किया है। यह काम बेहद जटिल है। पृथ्वी की निचली कक्षा में वस्तुएं करीब 7 से 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चलती हैं और कई निष्क्रिय उपग्रह अनियंत्रित ढंग से घूमते रहते हैं। लक्समबर्ग की कंपनी क्लियरस्पेस मलबा हटाने से आगे बढ़कर उपग्रहों की जांच, मरम्मत, रखरखाव और उनकी उम्र बढ़ाने का बाजार तैयार करना चाहती है।
एक टक्कर पैदा कर सकती है हजारों टुकड़े
रिपोर्ट के अनुसार किसी उपग्रह या रॉकेट के हिस्से की टक्कर हजारों नए टुकड़े पैदा कर सकती है। एस्ट्रोस्केल के वाणिज्यिक उपाध्यक्ष एंड्रयू फाइओला ने इसकी तुलना कार से टकराते ग्रेनेड से की है। छोटे टुकड़े अलग-अलग कक्षाओं में चले जाते हैं और कई बार इतने छोटे होते हैं कि उन्हें पृथ्वी से ट्रैक करना मुश्किल होता है। ये टुकड़े हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमते हैं। छोटा-सा टुकड़ा भी किसी उपग्रह को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। क्लियरस्पेस तो अंतरिक्ष के लिए ऐसा सेवा ढांचा विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जैसा धरती पर विमानन और समुद्री परिवहन में मौजूद है।
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