
इंदौर। प्राधिकरण ने दो बस टर्मिनल तो बना दिए, मगर उनके संचालन-संधारण की व्यवस्था नहीं की। हालांकि एक बस टर्मिनल एआईसीटीएसएल को सौंपा था, जिसने कुछ ही दिन संचालन कर बंद कर दिया और अब आरटीओ ऑफिस के पास स्थित नायता मुंडला के 40 करोड़ रुपए की लागत से बने इस बस टर्मिनल को 20 साल के ठेके पर दे दिया है। दूसरी तरफ एमआर-10 कुमेड़ी में 110 करोड़ रुपए की लागत से बने आईएसबीटी के लिए भी आखिरकार पुणे की एक फर्म पात्र पाई गई है और संभवत: इसी फर्म को बोर्ड द्वारा 20 साल की अवधि के लिए संचालन-संधारण का ठेका सौंपने का फैसला लिया जा सकता है।
प्राधिकरण ने एमआर-10 पर एयरपोर्ट की तर्ज पर विशाल बस टर्मिनल निर्मित करवा दिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इसका अवलोकन कर पसंद भी किया। मगर बीते 8 माह से यह बस टर्मिनल संचालन के अभाव में बंद पड़ा है। तीन बार पहले प्राधिकरण ने टेंडर बुलाए, मगर एक भी योग्य फर्म नहीं मिली। अब प्राधिकरण का कहना है कि पुणे का ग्रुप बीवीजी का टेंडर पात्र पाया गया है। उक्त ग्रुप 4.95 करोड़ रुपए की प्रीमियम राशि देने के अलावा 1 फीसदी की दर से रेंट यानि किराया भी चुकाएगा। चेन्नई और पुणे आईएसबीटी चलाने का इस ग्रुप के पास अच्छा अनुभव बताया जा रहा है।
प्राधिकरण ने हालांकि टेंडर शर्तों में लगातार संशोधन किए और कुछ शर्तें आसान भी की, ताकि संचालन-संधारण के लिए कोई ना कोई निजी कम्पनी मिल सके। वहीं इस आईएसबीटी को मेट्रो से भी कनेक्ट किया गया है और आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर एमआर-10 का यह बस टर्मिनल अत्यंत लाभदायक साबित होगा, क्योंकि यहीं से उज्जैन जाना-आना होगा और मेट्रो स्टेशन से इसे जोडऩे से उसका भी लाभ यात्री ले पाएंगे, क्योंकि गांधी नगर से रेडिसन तक मेट्रो का संचालन भी अभी कुछ दिनों बाद ही शुरू हो जाएगा। नायता मुंडला बस टर्मिनल को पिछले दिनों ठेके पर दे दिया और एआईसीटीएसएल को इससे लगभग 1 करोड़ रुपए की आय भी होगी। यह भी उल्लेखनीय है कि एआईसीटीएसएल से अब नगर निगम पूरी तरह से बाहर हो गया है और जो प्रदेशभर में रोडवेज की तर्ज पर बसें चलाना है उसके लिए शासन ने जो कम्पनी गठित की है, उसके अधीन इसका भी कामकाज रहेगा और सबसे पहले इंदौर-उज्जैन संभाग से ही ये बसें शुरू होंगी।
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