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केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ फिर शुरू हुआ ‘चिता आंदोलन’, जेल से रिहा होते ही किसानों-आदिवासियों ने खोला मोर्चा

July 07, 2026

छतरपुर। बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (Ken-Betwa River Interlinking Project) के विरोध में आदिवासी समुदाय (Tribal community) और किसान एक बार फिर आंदोलन के रास्ते पर उतर आए हैं। छतरपुर जिले में केन नदी की सहायक बरना नदी के किनारे प्रभावित ग्रामीणों ने दोबारा ‘चिता आंदोलन’ शुरू कर दिया है। आंदोलन का नेतृत्व जय किसान संगठन कर रहा है, जिसका आरोप है कि सरकार ने पहले दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं किया।

जेल से रिहाई के बाद फिर शुरू हुआ आंदोलन

जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा कि अप्रैल 2026 में प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया था। उनका आरोप है कि इसके बाद प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन से जुड़े लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें जेल भेजा गया।

भटनागर का कहना है कि जमानत मिलने के बाद भी 250 से अधिक लोगों के खिलाफ नए मामले दर्ज किए गए। उनके अनुसार, अब सरकार से किए गए वादों को लागू कराने के लिए आंदोलन दोबारा शुरू किया गया है।

ग्राम सभा और सहमति को लेकर उठाए सवाल

आंदोलनकारी नेताओं का आरोप है कि परियोजना से प्रभावित गांवों में कानून के अनुसार ग्राम सभाएं आयोजित नहीं की गईं। उनका कहना है कि स्थानीय समुदायों की सहमति लिए बिना परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है और सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment) की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई।

अमित भटनागर ने कहा कि प्रभावित लोग किसी तरह की राहत या अनुग्रह राशि नहीं मांग रहे, बल्कि केवल यह चाहते हैं कि सरकार अपने ही बनाए कानूनी प्रावधानों का पालन करे।

क्या है केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना?

केन-बेतवा लिंक परियोजना को केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में 44,605 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2024 में इस परियोजना का शिलान्यास किया था।

परियोजना का उद्देश्य केन और बेतवा नदियों को जोड़कर बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ाना है। इसका लाभ मध्य प्रदेश के नौ और उत्तर प्रदेश के चार जिलों को मिलने का दावा किया गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, परियोजना से—


    • 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी।
    • लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध होगा।
    • 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।

    विस्थापन और पर्यावरण को लेकर चिंता

    सरकारी अनुमान बताते हैं कि इस परियोजना से करीब 6,600 परिवारों का विस्थापन होगा तथा लगभग 45 लाख पेड़ों पर असर पड़ सकता है।

    परियोजना के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के भीतर केन नदी पर दौधन बांध का निर्माण प्रस्तावित है। इसी को लेकर पर्यावरणविद लगातार चिंता जता रहे हैं।

    अरावली विरासत जन अभियान की सह-संस्थापक नीलम अहलूवालिया का कहना है कि बांध बनने से 9,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जलमग्न हो सकता है, जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा शामिल है। उनके अनुसार, इससे बाघ, घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन, गिद्ध, चिंकारा, भेड़िये और कई दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों ने भी उठाए कानूनी सवाल

    साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) के समन्वयक और जल नीति विशेषज्ञ हिमांशु ठक्कर ने दावा किया है कि परियोजना से जुड़े कुछ पर्यावरणीय और वन स्वीकृति संबंधी प्रावधानों का पालन किए जाने को लेकर सवाल बने हुए हैं।

    उनके अनुसार, वन स्वीकृति की कुछ शर्तों के तहत पेड़ों की नई गणना और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होना आवश्यक थीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि सभी शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो वर्तमान निर्माण कार्य किस कानूनी आधार पर आगे बढ़ रहा है।

    सरकार का पक्ष

    केंद्र और राज्य सरकार का कहना है कि केन-बेतवा परियोजना बुंदेलखंड की वर्षों पुरानी जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान साबित होगी। सरकार का दावा है कि इससे सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

    दूसरी ओर, प्रभावित ग्रामीण, किसान संगठन और पर्यावरण से जुड़े समूह पुनर्वास, कानूनी प्रक्रियाओं और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर अपनी आपत्तियां लगातार दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में परियोजना के विकासात्मक लाभ और पर्यावरणीय-सामाजिक चिंताओं के बीच बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

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