तेहरान। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर जारी वैश्विक तनाव (global tension) अब और गंभीर होता दिख रहा है। एक ओर ईरान (Iran) ने इस अहम समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण मजबूत होने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि हालात नहीं सुधरे तो सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज पर तेहरान का दबदबा कायम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी खत्म नहीं की, तो इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
उन्होंने समुद्र में माइन्स हटाने के अमेरिकी प्रयासों को भी युद्धविराम का उल्लंघन बताया।
वॉशिंगटन में हाई-लेवल बैठक
ईरान की कार्रवाई और जहाजों पर फायरिंग की खबरों के बाद व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में आपात बैठक बुलाई गई। इसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कई शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
ट्रंप की चुप्पी पर सवाल
बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया और गोल्फ खेलने निकल गए। इस कदम को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले उन्होंने ईरान के रुख को “चालाकी” करार दिया था।
व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि अमेरिका ईरान से निपटने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका शांति चाहता है, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
समुद्र में बढ़ता खतरा
हालात ऐसे बन रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर बड़ा असर पड़ सकता है। जहाजों पर फायरिंग और समुद्री माइन्स की आशंका ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है, जहां हर कदम पर टकराव की आशंका नजर आ रही है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved