
प्राधिकरण को सौंपी इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ने जिम्मेदारी
इंदौर। कुछ वर्ष पूर्व शासन (Previous administration) ने सुपर कॉरिडोर (Super Corridor) पर देश की दो बड़ी आईटी कम्पनियों (IT companies) को 230 एकड़ जमीन (230 acres of land) ताबड़तोड़ आवंटित कर दी थी। टीसीएस (TCS) को 100 एकड़ और इन्फोसिस (Infosys ) को 130 एकड़ जमीन ओने-पौने दामों पर दी गई और इन दोनों कम्पनियों ने दावे के मुताबिक ना तो पूरी जमीन का उपयोग किया और ना ही रोजगार दिया, जिसके चलते शासन ने इन कम्पनियों से बची जमीन वापस भी ली, जिसमें इन्फोसिस से ली गई 50 एकड़ जमीन में से आधी यानी 25 एकड़ जमीन पर मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन आईटी पार्क निर्मित करवा रहा है, जिसका जिम्मा इंदौर विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है। ड्राइंग-डिजाइन के बाद प्राधिकरण इसके टेंडर जारी करेगा। कल संभागायुक्त और प्राधिकरण अध्यक्ष भास्कर लक्षकार ने इसके साथ ही अन्य प्रोजेक्टों की समीक्षा भी की।
पिछले दिनों ही तबादला होकर इंदौर आए संभागायुक्त ने तय किया कि हर मंगलवार को प्राधिकरण से जुड़े प्रोजेक्टों की समीक्षा करेंगे। इसके चलते कल वे प्राधिकरण दफ्तर पहुंचे और ढाई से तीन घंटे तक टीपीएस योजनाओं, स्टार्टअप पार्क, कन्वेंशन सेंटर से लेकर प्रस्तावित फ्लायओवरों, एमआर सहित अन्य योजनाओं की जानकारी ली। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स द्वारा निर्मित कराए जाने वाले आईटी पार्क के प्रोजेक्ट को भी उन्होंने प्रजेंटेशन के जरिए समझा। प्राधिकरण सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े सहित अन्य अधिकारी अभियंता इस दौरान मौजूद रहे। संभागायुक्त लक्षकार ने तकनीकी, नियोजन, सम्पदा सहित अन्य विभागों की जानकारी भी ली और प्रचलित योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट देखी। प्राधिकरण द्वारा निर्माणाधीन डबल डेकर ब्रिज के अलावा रोबोट और रेडिसन पर बनाए जाने वाले फ्लायओवरों के संबंध में भी प्रजेंटेशन देखा और जो प्रचलित टीपीएस योजनाएं हैं उनकी प्रगति और उनमें चल रहे विकास कार्यों की भी जानकारी सीईओ डॉ. झाड़े ने दी। यह भी उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण खुद पीपीपी मॉडल पर स्टार्टअप पार्क और कन्वेंशन सेंटर का निर्माण करने जा रहा है। हालांकि उसे कन्वेंशन सेंटर के लिए तो कोई उपयुक्त एजेंसी नहीं मिली। वहीं सुपर कॉरिडोर पर इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन द्वारा निर्मित किए जाने वाले आईटी पार्क का जिम्मा अवश्य उसे मिला है। शासन ने कुछ समय पूर्व इन्फोसिस से 50 एकड़ जमीन वापस ली थी, जिसे अन्य उद्योगों या आईटी कम्पनियों को आबंटित करने का भी निर्णय लिया। टिगरिया बादशाह और बांगड़दा क्षेत्र में शासन ने इन्फोसिस को 130 एकड़ जमीन का आवंंटन किया था, जिसमें से पिछले साल 50 एकड़ जमीन, जिसका उपयोग इन्फोसिस ने नहीं किया, वह वापस ले ली। लीज शर्तों के उल्लंघन और दावे के मुताबिक उतना रोजगार उपलब्ध ना कराने के कारणशासन ने जमीन वापस लेने का निर्णय लिया। प्राधिकरण का कहना है कि इस आईटी पार्क की ड्राइंग-डिजाइन से लेकर निर्माण की पूरी जिम्मेदारी मिली है और जल्द ही इसके टेंडर जारी कर दिए जाएंगे।
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