
इन्दौर। प्रदेश के मुख्यमंत्री और इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ इंदौर नगर निगम की महापौर परिषद के सदस्यों की बैठक होगी। इस बैठक में सभी सदस्यों द्वारा अपने-अपने विभाग में आ रही समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और उनका समाधान मांगा जाएगा।
इंदौर नगर निगम की हालत बहुत खराब है। सभी महापौर परिषद के सदस्य अपने-अपने विभाग की स्थिति से हैरान-परेशान हैं। विकास कार्य करने के लिए पैसा नहीं है तो बाकी काम के लिए अधिकारी सुन नहीं रहे हैं। बहुत सारे मामले तो ऐसे हैं, जो राज्य सरकार के स्तर पर फैसला लेने के लिए रुके हुए हैं। ऐसे सारे मामलों पर महापौर परिषद के सदस्य मुख्यमंत्री के साथ सीधी बात करना चाहते हैं।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ महापौर परिषद के सदस्यों द्वारा मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चर्चा के लिए समय मांगा गया है। मुख्यमंत्री ने इनकी बात सुनकर कहा है कि जल्द ही समय निश्चित कर देंगे तो आप लोग भोपाल आ जाना, वहीं पर बैठक कर लेंगे। मुख्यमंत्री द्वारा बैठक के लिए सहमति दिए जाने के बाद अब महापौर परिषद के सदस्यों द्वारा अपने-अपने विभाग के मुद्दों की सूची बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस सूची को इस बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष रखकर उनसे समस्याओं का निराकरण कराया जाएगा।
पोर्टल का मुद्दा भी उठेगा
राज्य सरकार द्वारा दी गई अनुमति के आधार पर इंदौर नगर निगम द्वारा अपना खुद का पोर्टल बना लिया गया है। इस पोर्टल के लिए ई-नगर पालिका से इंदौर नगर निगम का डाटा चाहिए है। यह डाटा नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा दो-तीन बार नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे से चर्चा कर ली गई है। हर बार दुबे द्वारा मामले पर ध्यान देने का आश्वासन दिया गया है। पिछली बार तय हुआ था कि नगर निगम द्वारा बनाए गए पोर्टल का भोपाल में प्रेजेंटेशन रख देते हैं। फिर यदि यह पोर्टल राज्य सरकार को उचित लगेगा तो इसके लिए डाटा दे दिया जाएगा। इसके बाद से लेकर अब तक इस मीटिंग का टाइम भी तय नहीं हो सका है।
निगम की आर्थिक स्थिति बड़ा मुद्दा
इंदौर नगर निगम की खराब आर्थिक स्थिति सबसे बड़ा मुद्दा है। अभी तो हालत यह है कि नगर निगम को हर महीने अपने अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे की व्यवस्था करने में लगना पड़ता है। ठेकेदारों के 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के बिल लंबित पड़े हुए हैं। इन बिल में से 10-20त्न राशि का भी निगम भुगतान नहीं कर पा रहा है। यही कारण है कि नए विकास कार्यों के लिए ठेकेदारों द्वारा टेंडर नहीं भरे जाते हैं। अब तो नगर निगम को बहुत सारे काम के लिए 5 से लेकर 10 बार तक टेंडर निकालना पड़ रहे हैं। यह मुद्दा भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि इंदौर नगर निगम का चुंगी क्षतिपूर्ति, प्रवेश कर और स्टाम्प ड्यूटी का करोड़ों रुपया राज्य सरकार पर बकाया है, जो कि नहीं मिल रहा है।
अधिकारियों की कमी को दूर करने की उठेगी आवाज
इंदौर नगर निगम में बड़े अधिकारियों के पद पर तो सरकार द्वारा खूब नियुक्ति कर दी गई है, लेकिन मैदान में काम करने वाले अधिकारियों के पद खाली पड़े हुए हैं। निगम के पास उपायुक्त के मंजूर किए गए पद खाली पड़े हुए हैं। इन पद पर बार-बार आग्रह किया जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से कोई नियुक्ति नहीं की जा रही है। अब तो नगर निगम के बहुत सारे विभाग ऐसे हो गए हैं, जिनमें विभाग के प्रमुख के बाद सीधे अपर आयुक्त ही हैं।
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