
नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत (India) के लिए ऊर्जा मोर्चे पर राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने भारत सहित कई देशों को 16 मई तक रूस (Russia) से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से भारत को बड़ी सहूलियत मिली है, क्योंकि वह अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस से आयात कर रहा है।
मार्च में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का करीब 45% हिस्सा रूस से लिया। इस दौरान रूस से रोजाना लगभग 22 लाख बैरल (BPD) तेल खरीदा गया, जो हाल के महीनों के मुकाबले काफी ज्यादा है। इससे देश में तेल की सप्लाई सुचारु बनी रही और किसी तरह की कमी नहीं आई।
पहले रूस से समुद्री मार्ग के जरिए तेल खरीदने की अनुमति 19 अप्रैल तक थी, जिसे अब बढ़ाकर 16 मई कर दिया गया है। भारत समुद्री रास्ते से रूसी तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा ग्राहक बन चुका है, जबकि चीन पाइपलाइन और समुद्री दोनों माध्यमों से रूस से तेल आयात करता है।
अमेरिका की मंजूरी मिलते ही रूसी तेल लेकर चल रहे कई टैंकरों ने अपना रुख भारत की ओर कर लिया। ये जहाज गुजरात के वाडिनार और ओडिशा के पारादीप जैसे प्रमुख बंदरगाहों की तरफ बढ़े। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तेल की मांग बढ़ने से भारत को पहले जैसी भारी छूट अब नहीं मिल रही है।
यूरोप के थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA)’ के अनुसार, मार्च में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात तेज़ी से बढ़ा है। भारत ने इस दौरान करीब 5.8 अरब डॉलर का तेल खरीदा, जो फरवरी के 1.54 अरब डॉलर की तुलना में तीन गुना से अधिक है।
इसके अलावा, भारत ने मार्च में रूस से 371 मिलियन डॉलर का कोयला और 196 मिलियन डॉलर के पेट्रोलियम उत्पाद भी आयात किए। मार्च 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद से भारत, रूस के तेल का एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है।
2024 में भारत ने रूस से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, जबकि पिछले साल कुल आयात लगभग 44 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल से दूरी बनाने के बाद भारत ने सस्ते दामों का फायदा उठाते हुए आयात बढ़ाया, जो अब भी जारी है।
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