उज्‍जैन

बिनोद मिल क्षेत्र में राष्ट्रीय पक्षी मोर कुत्तों से जान बचाते फिर रहे हैं

  • आवारा कुत्तों से खुद को बचा रहे-वन विभाग और जिला प्रशासन ध्यान दे

उज्जैन। स्मार्ट सिटी योजना के तहत जब से बिनोद मिल क्षेत्र की जमीन पर जंगलों को उजाड़ा जा रहा है तो यहाँ वर्षों से रह रहे राष्ट्रीय पक्षी मोर की जान खतरे में आ गई है। जंगल छिनने के बाद यही राष्ट्रीय पक्षी अब आवारा कुत्तों से अपनी जान बचाने के लिए आसपास के रहवासियों के घरों में शरण ले रहे हैं। शहर की बंद हुई मिलों की जमीनें सालों से वीरान पड़ी थी और इनमें घने पेड़ पौधे विकसित हो गए। हालांकि जब यह मिलें चलती थी तब भी इनमें घने पेड़-पौधे हुआ करते थे और सैकड़ों की संख्या में वहाँ राष्ट्रीय पक्षी मोर भी सुरक्षित रहते थे। हीरा मिल की जमीन तथा चाल से लेकर बिनोद विमल मिल की जमीन तक मिलें बंद होने के बाद चारों ओर घने पेड़ पौधे विकसित होते रहे। इन क्षेत्रों में बीच शहर में एक तरह से जंगल जैसा प्राकृतिक वातावरण बन गया था।


यही कारण था कि वर्षों से यहाँ सैकड़ों की संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोरों ने अपने आशियाने बना रखे थे। आते-जाते कभी भी बंद पड़ी मिलों की जमीनों पर इन मोरों को जंगल में नाचते हुए लोगों ने देखा था लेकिन पिछले दो साल से बिनोद मिल की रिक्त पड़ी जमीन पर जब से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट सड़कें बनना शुरु हुई है तब से इस क्षेत्र के जंगल को पूरी तरह उजाड़ा जा रहा है। यहाँ बड़े-बड़े पुराने पेड़ों को भी सड़क व अन्य निर्माणों के लिए बड़ी संख्या में काटा गया। यही कारण है कि इन पर सुरक्षित रहने वाले अन्य पक्षियों की तरह राष्ट्रीय पक्षी मोर भी बेघर होते चले गए। क्षेत्र तथा आसपास के लोगों का कहना है कि पेड़ पौधे यहाँ से खत्म हो जाने के बाद राष्ट्रीय पक्षी मोर असुरक्षित होते जा रहे हैं। क्योंकि पेड़ नहीं होने के कारण आवारा श्वान उन्हें आसानी से अपना शिकार बना रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई बार उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग को भी दी लेकिन यहाँ से बेघर हुए राष्ट्रीय पक्षी मोर को सुरक्षित जंगल तक पहुँचाने के लिए वन विभाग की ओर से कोई नहीं आया। अब स्थिति यह है कि जब कभी आवारा कुत्ते मोरों को नोचने के लिए दौड़ते हैं तो वह अपनी जान बचाने के लिए आसपास के रहवासियों के घरों में घुस जाते हैं। लोग भी उन्हें आश्रय देते हैं लेकिन लोगों को डर है कि आवारा कुत्तों द्वारा घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर अगर उनके घर या आंगन में आकर मर गया तो उलटे वन विभाग और पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। ऐसे में वन विभाग तथा जिला प्रशासन को तत्काल इस क्षेत्र में शेष बचे राष्ट्रीय पक्षी मोर को बचाने के लिए उन्हें यहाँ से अन्य सुरक्षित स्थान पर भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए।

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